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Kotdwar News: वन मंत्री के बयान पर भड़की यूकेडी, ग्रामीणों ने भी जताया आक्रोश
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ग्रामीण बोले, अधिकारियों की भाषा बोल रहे धामी सरकार के वन मंत्री, धरातलीय स्थिति का नहीं ज्ञान
यूकेडी समेत कई सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और वन्यजीव प्रभावित रिखणीखाल के ग्रामीणों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल के उस बयान की घोर निंदा की है, जिसमें उन्होंने वन्यजीव संघर्ष के लिए ग्रामीणों को ही जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ रिखणीखाल और नैनीडांडा के दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतार चुका है। गुलदार हर महीने घर आंगन व खेत खलिहानों में ग्रामीणों पर हमला कर रहा है, लेकिन भाजपा सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
कण्वाश्रम में यूकेडी के महानगर अध्यक्ष जगदीपक सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन मंत्री के बयान पर हैरानगी प्रकट की गई। यूकेडी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार पहाड़वासियों को पहाड़ से खदेड़ने के लिए षड्यंत्र रच रही है। कहा कि जंगली जानवरों के आतंक से 2000 से अधिक गांव खाली हो गए हैं। वन्यजीव के हमले में मौत का मुआवजा 50 लाख होना चाहिए। बैठक का संचालन पितृशरण जोशी ने किया। उधर, रिखणीखाल के प्रधान देवेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह और खुशेंद्र सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों ने वन मंत्री के बयान पर कहा कि वन मंत्री को धरातलीय हालात का ज्ञान नहीं है। वे अधिकारियों की भाषा बोल रहे हैं। पहाड़ों में लोगों की जान वन्यजीवों के मुकाबले सस्ती हो गई है।
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यूकेडी समेत कई सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और वन्यजीव प्रभावित रिखणीखाल के ग्रामीणों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल के उस बयान की घोर निंदा की है, जिसमें उन्होंने वन्यजीव संघर्ष के लिए ग्रामीणों को ही जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ रिखणीखाल और नैनीडांडा के दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतार चुका है। गुलदार हर महीने घर आंगन व खेत खलिहानों में ग्रामीणों पर हमला कर रहा है, लेकिन भाजपा सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
कण्वाश्रम में यूकेडी के महानगर अध्यक्ष जगदीपक सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन मंत्री के बयान पर हैरानगी प्रकट की गई। यूकेडी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार पहाड़वासियों को पहाड़ से खदेड़ने के लिए षड्यंत्र रच रही है। कहा कि जंगली जानवरों के आतंक से 2000 से अधिक गांव खाली हो गए हैं। वन्यजीव के हमले में मौत का मुआवजा 50 लाख होना चाहिए। बैठक का संचालन पितृशरण जोशी ने किया। उधर, रिखणीखाल के प्रधान देवेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह और खुशेंद्र सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों ने वन मंत्री के बयान पर कहा कि वन मंत्री को धरातलीय हालात का ज्ञान नहीं है। वे अधिकारियों की भाषा बोल रहे हैं। पहाड़ों में लोगों की जान वन्यजीवों के मुकाबले सस्ती हो गई है।
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