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दस गांवों को विस्थापन की दरकार

Mon, 07 Sep 2020 08:54 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 08:54 PM IST
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Ten villages need displacement
पौड़ी जिले में दुगड्डा विकासखंड के पुलिंडा और यमकेश्वर के कसाण गांव समेत स्खलन और भूधंसाव प्रभावित 10 गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों को पूरे बरसात का मौसम खौफ में काटना पड़ता है। भूस्खलन प्रभावितों को हर वक्त यह चिंता बनी रहती है कि न जाने कब गांव में भूस्खलन और भूधंसाव शुरू हो जाए। परिवारों के लिए विस्थापन और पुनर्वास के लिए बनाए गए प्रस्ताव जिला मुख्यालय और सचिवालय में धूल फांक रही है।
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छह साल पहले राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जिले के दस गांवों को अति संवेदनशील मानते हुए इनके विस्थापन और पुनर्वास के लिए शासन को पत्र भेजा था। आईआईटी रुड़की व भू-वैज्ञानिकों ने इन गांवों का सर्वे कर इन्हें आपदा के लिहाज से संवेदनशील भी करार दिया, लेकिन अब तक बात नहीं बनी। तहसील कोटद्वार में पुलिंडा, चूना महेड़ा, स्यालकंडी, सिमल्या, मवासा, केष्टा, बडरौ, यमकेश्वर तहसील में कसाण, गड़कोट व तहसील पौड़ी में वजली गांव को पुनर्वास योजना में शामिल किया गया था। इन दस गांवों में 225 परिवार रहते हैं। विस्थापन और पुनर्वास समिति के अध्यक्ष केशर सिंह नेगी बताते हैं कि भूस्खलन से न केवल खेती तबाह हुई, बल्कि कई घर भी जमींदोज हो चुके हैं।
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शासन स्तर पर केवल पुलिंडा गांव के विस्थापन और पुनर्वास का प्रस्ताव विचाराधीन है। शासन से गांव के संबंध में जानकारी मांगी गई थी, जिसका जवाब शासन को भेजा जा चुका है। - डा. एसके बरनवाल, अपर जिलाधिकारी पौड़ी।
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