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जरूरतमंद छात्रों की सहायता को तत्पर रहते है दिव्यांग शिक्षक संतोष नेगी
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जरूरतमंद छात्रों को साइकिल वितरित करते गणित शिक्षक संतोष नेगी। (फाइल फोटो)
- फोटो : KOTDWAR
दूसरे की पीड़ा को वही व्यक्ति समझ सकता हैं, जिसने अपने जीवन में उतार-चढ़ाव देखे हों। हम ऐसे ही शख्सियत के की बात कर रहे हैं, जिन्होंने दिव्यांग होते एक मुकाम हासिल किया। वे यही नहीं रुके, उन्होंने गरीब तबके और जरूरतमंद छात्र-छात्रओं की सहायता करने को अपने जीवन का मकसद बना लिया है। जीआईसी कोटद्वार में गणित शिक्षक के पद पर कार्यरत शिक्षक संतोष नेगी जनसहभागिता से अभी तक दो लाख रुपये की साइकिलें जरूरतमंद बच्चों को वितरित कर चुके हैं। उन्होंने हाल ही में हुए अपने विवाह समारोह पर छात्रों को 50 हजार की साइकिलें वितरित की। वह समय-समय पर जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सोलर लालटेन, ड्रेस, जूते सहित स्टेशनरी भी वितरित करते रहते हैं।
संतोष नेगी जन्म से ही दिव्यांग है। बचपन में उनकी माता बीमारी के चलते और बाद में पिता का भी स्वर्गवास हो गया। माता-पिता की असमय मृत्यु के पश्चात संतोष नेगी ने घर का सारी जिम्मेदारियां उठाई। संतोष सिंह नेगी 2013 में उत्तराखंड सरकार की ओर से श्रेष्ठ दिव्यांग कर्मी, 2015 में श्रेष्ठ विज्ञान शिक्षक, 2012 में माइंड ऑफ स्टील अवार्ड, 2013 में गोडफे फिलिप अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। 26 जून 2016 को मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संतोष नेगी के जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ भी की थी। इसके अलावा वह दो बार प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं।
संतोष नेगी बताते हैं कि भारत में नवरात्रों में कन्या को अन्न, धन देने की परंपरा रही है। इसी परंपरा में नया आयाम जोड़ते हुए वह अपने विद्यालय की एक मेधावी और जरूरतमंद छात्रा को साइकिल प्रदान करते हैं। बताया कि मात्र दो साल में जीआईसी कोटद्वार के अलावा, आर्य कन्या इंटर कालेज, इंटर कालेज मोटाढांक, जीआईसी सुखरो की जरूरतमंद छात्राओं को दो लाख की साइकिलें प्रदान कर चुके हैं।
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संतोष नेगी जन्म से ही दिव्यांग है। बचपन में उनकी माता बीमारी के चलते और बाद में पिता का भी स्वर्गवास हो गया। माता-पिता की असमय मृत्यु के पश्चात संतोष नेगी ने घर का सारी जिम्मेदारियां उठाई। संतोष सिंह नेगी 2013 में उत्तराखंड सरकार की ओर से श्रेष्ठ दिव्यांग कर्मी, 2015 में श्रेष्ठ विज्ञान शिक्षक, 2012 में माइंड ऑफ स्टील अवार्ड, 2013 में गोडफे फिलिप अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। 26 जून 2016 को मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संतोष नेगी के जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ भी की थी। इसके अलावा वह दो बार प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं।
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संतोष नेगी बताते हैं कि भारत में नवरात्रों में कन्या को अन्न, धन देने की परंपरा रही है। इसी परंपरा में नया आयाम जोड़ते हुए वह अपने विद्यालय की एक मेधावी और जरूरतमंद छात्रा को साइकिल प्रदान करते हैं। बताया कि मात्र दो साल में जीआईसी कोटद्वार के अलावा, आर्य कन्या इंटर कालेज, इंटर कालेज मोटाढांक, जीआईसी सुखरो की जरूरतमंद छात्राओं को दो लाख की साइकिलें प्रदान कर चुके हैं।
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