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राज्य की नीतियां बनाने के लिए बनाएं सामूहिक दबाव
ब्यूरो/अमर उजाला,कोटद्वार।
Updated Sun, 21 Aug 2016 10:15 PM IST
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कोटद्वार में किताबों के बहाने जन, जंगल और जमीन पर परिचर्चा में बोलते पद्मश्री डा. अनिल जोशी।
- फोटो : Amar Ujala
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किताबों के बहाने जन, जंगल और जमीन पर परिचर्चा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने पहाड़ की पीड़ा को उजागर किया। कहा कि राज्य गठन के सोलह साल बाद भी हालात जस के तस हैं। उत्तराखंड से चालीस फीसदी पलायन हो चुका है।
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पलायन के कारणो को तलाशने और उनके समाधान के लिए प्रयास तक नहीं हुए। पहाड़ खाली होते जा रहे हैं और मैदानी इलाकों पर जनसंख्या का दबाव बढ़ता जा रहा है। अब राज्य की नीतियां बनाने के लिए लोगों को सामूहिक दबाव बनाने की जरूरत है।
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पूर्व सूचना आयुक्त प्रभात डबराल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में जहां साहित्यकार राहुल भट्ट ने अपनी पुस्तक रूट्स के जरिए टिहरी बांध के विस्थापन की पीड़ा को उजागर किया, वहीं आपदा और पलायन के कुछ अनछुए पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हृदयेश जोशी ने अपनी पुस्तक तुम क्यों चुप रहे केदार और लाल लकीर ने केदारनाथ की त्रासदी और बस्तर, छत्तीसगढ़, झारखंड के अपने अनुभवों को विस्तार से बताया। कहा कि सभी जगह संसाधनों को कब्जाने की होड़ लगी है और उत्तराखंड भी इसका शिकार हो रहा है। उत्तराखंड में जनता के विरोध के बावजूद बांध निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
वरिष्ठ पत्रकार रितुल जोशी ने कहा कि भले ही उनका कार्यक्षेत्र पहाड़ नहीं रहा, लेकिन केदारनाथ की आपदा के बाद वह यहां की समस्याओं से रूबरू हुई। हालात यह है कि दिल्ली में आठ लेन वाली सड़क पर चलने वाले लोग पहाड़ की एक सड़क पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। डा. अनिल जोशी ने व्यवस्था परिवर्तन पर जोर दिया। कहा कि विकास की प्रक्रिया गांव से शुरू होनी चाहिए। पारंपरिक रोजगार को बढ़ाने की जरूरत है।
कहा कि जौनसार बावर में लोग अपनी पारंपरिक खेती बाड़ी में लगे हैं, क्योंकि वहां बाजार मौजूद है। गोष्ठी में मौजूद लोगों ने मुख्य अतिथि और वक्ताओं से सवाल जवाब भी किए। कार्यक्रम में डा. पदमेश बुड़ाकोटी, डा. दिवाकर बेवनी, जीतेंद्र चौहान, अमित सजवाण, संतोष नेगी, वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र सिंह ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र सिंह और जीतेंद्र चौहान ने संयुक्त रुप से किया।