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हटाए वन प्रहरियों ने की बहाल करने की मांग
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कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) की ओर से कैंपा योजना के तहत रखे गए वन प्रहरियों को हटाने के बाद उन्हें साढ़े तीन माह के शेष वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। सोना नदी रेंज के वन प्रहरियों ने इस संबंध डीएफओ को ज्ञापन भेजकर उन्हें पुन: बहाल करने और शेष वेतन का भुगतान करने की मांग उठाई।
सोना नदी रेंज के वन प्रहरियों ने कहा कि जुलाई, 2021 में कैंपा योजना के तहत पूरे उत्तराखंड में 10 हजार वन प्रहरियों की तैनाती की गई थी। केटीआर के सोना नदी रेंज में भी वन प्रहरियों की तैनाती की गई। कहा कि उन्हें सितंबर माह तक का वेतन भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद करीब साढ़े तीन माह के वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इस बीच 15 जनवरी, 2022 को केटीआर प्रशासन ने वन प्रहरियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया लेकिन शेष साढ़े तीन माह का वेतन नहीं दिया गया। कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण अधिकांश वन प्रहरी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि उन्हें परिवार के भरणपोषण के लाले पड़ गए हैं। ज्ञापन में उन्होंने ग्राम प्रहरियों को बहाल करने और उन्हें साढ़े तीन माह के शेष वेतन का भुगतान करने की मांग उठाई। ज्ञापन भेजने वालों में पीतांबर सिंह, रामवीर, दयाराम, गजेंद्र सिंह, पाली सिंह, मोहित, कमल सिंह, अमन खान, हितेश कुमार, विजय कुमार रवि, राजकुमार, राजू गौड़ और अभिषेक आदि शामिल रहे।
वन प्रहरियों को मानदेय भुगतान के लिए धनराशि न होने के कारण उन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा है। बकाया वेतन भुगतान के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जा रहा है। - प्रकाश आर्य, डीएफओ कालागढ़ वन प्रभाग, लैंसडौन।
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सोना नदी रेंज के वन प्रहरियों ने कहा कि जुलाई, 2021 में कैंपा योजना के तहत पूरे उत्तराखंड में 10 हजार वन प्रहरियों की तैनाती की गई थी। केटीआर के सोना नदी रेंज में भी वन प्रहरियों की तैनाती की गई। कहा कि उन्हें सितंबर माह तक का वेतन भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद करीब साढ़े तीन माह के वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इस बीच 15 जनवरी, 2022 को केटीआर प्रशासन ने वन प्रहरियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया लेकिन शेष साढ़े तीन माह का वेतन नहीं दिया गया। कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण अधिकांश वन प्रहरी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि उन्हें परिवार के भरणपोषण के लाले पड़ गए हैं। ज्ञापन में उन्होंने ग्राम प्रहरियों को बहाल करने और उन्हें साढ़े तीन माह के शेष वेतन का भुगतान करने की मांग उठाई। ज्ञापन भेजने वालों में पीतांबर सिंह, रामवीर, दयाराम, गजेंद्र सिंह, पाली सिंह, मोहित, कमल सिंह, अमन खान, हितेश कुमार, विजय कुमार रवि, राजकुमार, राजू गौड़ और अभिषेक आदि शामिल रहे।
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वन प्रहरियों को मानदेय भुगतान के लिए धनराशि न होने के कारण उन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा है। बकाया वेतन भुगतान के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जा रहा है। - प्रकाश आर्य, डीएफओ कालागढ़ वन प्रभाग, लैंसडौन।
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