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महिला अपराधों में दोषसिद्ध होते ही तत्काल मिले सजा

Fri, 07 Feb 2020 10:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 10:18 PM IST
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Punish as soon as convicted in women's crimes
कोटद्वार में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में विचार रखती महिलाएं। - फोटो : KOTDWAR
महिला अपराधों में दोषसिद्ध होते ही गुनाहगारों को तत्काल सजा मिलनी चाहिए। सरकार को निर्भया कांड से सबक लेते हुए ऐसे बदलाव करने होंगे, जिससे गुनाहगारों को जल्द सजा मिल सके। महिलाओं से जुड़े इस तरह के अपराध को रोकने और उन्हें त्वरित सजा दिलाने के लिए निर्भया कांड के बाद कड़े कानून भी बने हैं, लेकिन इस केस में लगातार फांसी लटक रही है। ये विचार शहर की जागरूक महिलाओं ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में बेबाकी से व्यक्त किए हैं।
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शुक्रवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् मुन्नी रावत ने की। कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि दोषसिद्ध होने के बाद दोषियों को जल्द सजा मिलनी चाहिए। निर्भया जैसे जघन्य अपराध में सात साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया पीड़ित परिवार को और दर्द देती है। कई महिलाओं ने ऐसे अपराधों को अकुंश लगाने के लिए हैदराबाद जैसे इनकाउंटर की वकालत की।
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निर्भया प्रकरण में दोषी सिद्ध होने के बाद भी गुनाहगार हर बार कानून की कमजोर कड़ियों का लाभ उठा रहे हैं। कानून में परिवर्तन करने की नितांत जरूरत है।
-मुन्नी रावत, प्रधानाचार्य ज्ञानभारती स्कूल
निर्भया कांड में इंसाफ मिलने में हो रही देरी पीड़ित परिवार को ज्यादा दर्द दे रही है। अब और देरी नहीं होनी चाहिए। पूरा देश निर्भया के परिवार के साथ खड़ा है।
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-शिल्पी अग्रवाल, गृहणी नजीबाबाद रोड
बेटियों को घर से बाहर भेजने का विचार मन में आते ही हमें उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता हो जाती है। कड़ी सजा से ही समाज में अच्छा माहौल बनेगा।
-सविता गुसाईं, शिवालिक नगर
निर्भया मामले में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद इसे अधिक दिनों तक नहीं लटकाया जाना चाहिए। दोषियों को जल्द सजा मिले।
-प्रीति सिंह, पदमपुर सुखरो
महिलाओं की सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय है। अगर कानून में संशोधन कर जल्दी इंसाफ की व्यवस्था की जाए, तो महिला अपराध बहुत कम हो जाएंगे।
- सृष्टि आर्य, छात्रा, पीजी कालेज कोटद्वार।
कानून ऐसा होना चाहिए, जिसमें लोगों को इंसाफ पाने के लिए ज्यादा संघर्ष न करना पड़े और समाज में अपराध के खिलाफ कड़ा संदेश भी जाय।
-रुचिका आर्य, पदमपुर सुखरो
यदि न्याय पाने में इतनी देरी और जटिलता रहेगी, तो लोगों का कानून व्यवस्था से विश्वास उठेगा। ऐसे में हैदराबाद इनकाउंटर ही सही लगने लगेगा।
-रिंकी पुंडीर, समाजसेवी पदमपुर
महिलाओं से जुड़े अपराध घृणित सोच के कारण घटित हो रहे हैं, ऐसे अपराधियों को जल्द सजा देकर ही समाज को सुरक्षित रखा जा सकता है।
-किरन डंडरियाल, लालपानी कोटद्वार
बेटियों की सुरक्षा गंभीर विषय है। इस बारे में घर से लेकर कानून तक हर जगह चिंता करने की जरूरत है। सिस्टम में सुधार जरूरी है।
-पूनम राणा, शिवपुर
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर होने की जरूरत है। कानून में समय के अनुसार बड़े बदलाव की जरूरत है।
-उषा असवाल, समाज सेवी, गाड़ीघाट
महिलाओं से जुड़े अपराधों में ऐसे कड़े कानून बनने चाहिए, जिसमें अपराधियों के बचने के लिए कमजोर कड़ियां न हो।
-राहत एडवोकेट, गाड़ीघाट
हमारा कानून काफी लचीला है। निर्भया प्रकरण में चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया में आम जनता ने कानून की कमजोर कड़ियों को समझा है। इसमें बदलाव होना चाहिए।
-वंदना जखमोला, शिक्षिका
दोषसिद्ध अपराधियों के पास एक निर्धारित समय होना चाहिए। वे दया याचिका दायर करते हैं तो ठीक, नहीं तो फांसी दे दी जानी चाहिए।
-नीलम रावत, एडवोकेट गाड़ीघाट
निर्भया केस में लगातार लटकती फांसी का समाज में गलत संदेश जाता है। इंसाफ में देरी पीड़ित परिवार के लिए अन्याय के समान है।
-मधु रावत, समाज सेवी शिवालिक नगर
निर्भया प्रकरण में जिस तरह इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। इससे निर्भया के परिवार का दर्द समझा जा सकता है। देर से ही सजा तो मिलेेगी ही।
-संगीता नेगी, गृहणी, काशीरामपुर
महिलाओं से जुड़े जघन्य अपराधों के लिए भले ही फास्टट्रेक कोर्ट बनाए गए हैं, लेकिन उच्च न्यायालयों में न्याय की लड़ाई हर पीड़ित के वश में नहीं होता।
-अनीता नेगी, गृहणी नजीबाबाद रोड
निर्भया के दोषियों को फांसी देने में हो रही देरी से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। तभी लोग हैदराबाद जैसे इनकाउंटर की मांग कर रहे हैं। सरकार को सोचना होगा।
-रंजना रावत, पूर्व सभासद कोटद्वार
महिलाएं जब तक पूरी ताकत के साथ खड़ी नहीं होंगी, तब तक उन पर अपराध होते रहेंगे। बेटियों को पहले से अधिक जागरूक होना होगा।
-अलका बिष्ट, प्रवक्ता आर्य कन्या इंटर कालेज
निर्भया कांड के चारों दोषियों को दो साल के भीतर ही फांसी दे दी जानी चाहिए थी। वह हमारे कानून का गलत फायदा उठा रहे हैं।
-हेमा अग्रवाल, शिक्षिका कोटद्वार
बेटियों को सशक्त बनाकर ही महिला अपराधों से बचा जा सकता है। निर्भया कांड में दोषियों की सजा लगातार टलना देशवासियों को खल रहा है।
-शोभा रावत, योग प्रशिक्षक दुर्गापुर
महिलाओं को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करनी चाहिए, देर से ही सही दोषियों को सजा जरूर मिलती है।
-सुमित्रा रावत, गृहणी, काशीरामपुर
महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर उन्हें सबला बनाने की जरूरत है।
-आशा थपलियाल, योग शिक्षिका मानपुर।
महिलाओं को ज्यादा कानूनी मदद और जानकारी की जरूरत होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इस संबंध में कैंप लगा रहे हैं।
-राखीपाल, पैरालीगल एडवाइजर
निर्भया कांड के दोषी अब ज्यादा दिन तक नहीं बच पाएंगे। फांसी का फंदा उनके गले तक पहुंच गया है।
-विमलेश नेगी, गृहणी सिताबपुर।
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