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पेयजल लाइनों को बदलने का प्रस्ताव फाइलों में कैद
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शासन की बेरुखी के कारण नगर निगम क्षेत्र की लाखों की आबादी पेयजल किल्लत से जूझ रही है। 40 साल पुरानी जर्जर पेयजल लाइनें अब जवाब देने लगी है। इनको बदलने के लिए जलसंस्थान की ओर से शासन को भेजा गया करीब 4.29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राजधानी देहरादून की फाइलों में कैद है।
कोटद्वार भाबर क्षेत्र में 80 से 90 के दशक में आबादी के हिसाब से मुख्य मार्गों पर कहीं दो तो कहीं चार इंच पेयजल लाइन बिछाई गई थी। तब क्षेत्र की आबादी बहुत कम थी। लोगों को पर्याप्त पेयजल मिल जाता था। समय बदलने के साथ वर्तमान में क्षेत्र की आबादी कई गुना बढ़ गई, लेकिन नई पेयजल लाइन नहीं बिछाई गई। अब 40 साल पुरानी पेयजल लाइनें जर्जर होकर लीक होने लगी है और दो इंच पाइप लाइन का पानी लाखों की आबादी के लिए पर्याप्त नहीं हो रहा है।
जनवरी 2021 में जलसंस्थान ने नगर निगम के सनेह क्षेत्र के लिए 33.70 लाख, भाबर के हल्दूखाता क्षेत्र के लिए 99.62 लाख, भाबर के मोटाढांक क्षेत्र के लिए 98.21 लाख, कोटद्वार शहरी क्षेत्र के लिए 99.62 लाख, शहर और भाबर के बीच के क्षेत्र रिगड्डी पार्ट वन क्षेत्र के लिए 99.42 लाख और रिगड्डी पार्ट टू क्षेत्र के लिए 98. 00 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन आज तक पाइप लाइन बिछाने के लिए जलसंस्थान को एक धेला तक नहीं मिला।
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लाइन लीकेज से सड़कें हो रही क्षतिग्रस्त
कोटद्वार। पूर्व में सड़कों के किनारे बिछाई गई पेयजल लाइन अब चौड़ीकरण होने के कारण सड़कों के बीचोंबीच आ गई है। जर्जर लाइन पानी का प्रेशर नहीं झेल पा रही है, जिससे सड़कों के बीचों बीच लीकेज के कारण गड्ढे बन गए हैं। गड्ढों से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जो दुर्घटना के सबब बने हुए हैं। आए दिन दो पहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। लोग विभाग को पेयजल लाइन लीकेज के लिए शिकायत कर रहे हैं, लेकिन बजट के अभाव में विभाग लाइनों पर जोड़कर किसी प्रकार काम चला रहा है।
पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने के लिए अभी किसी प्रकार का बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जर्जर पेयजल लाइनों के लीकेज की मरम्मत की जा रही है। प्रस्तावित बजट आने पर पुरानी पेयजल लाइनों को बदला जाएगा।
- संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान कोटद्वार
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कोटद्वार भाबर क्षेत्र में 80 से 90 के दशक में आबादी के हिसाब से मुख्य मार्गों पर कहीं दो तो कहीं चार इंच पेयजल लाइन बिछाई गई थी। तब क्षेत्र की आबादी बहुत कम थी। लोगों को पर्याप्त पेयजल मिल जाता था। समय बदलने के साथ वर्तमान में क्षेत्र की आबादी कई गुना बढ़ गई, लेकिन नई पेयजल लाइन नहीं बिछाई गई। अब 40 साल पुरानी पेयजल लाइनें जर्जर होकर लीक होने लगी है और दो इंच पाइप लाइन का पानी लाखों की आबादी के लिए पर्याप्त नहीं हो रहा है।
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जनवरी 2021 में जलसंस्थान ने नगर निगम के सनेह क्षेत्र के लिए 33.70 लाख, भाबर के हल्दूखाता क्षेत्र के लिए 99.62 लाख, भाबर के मोटाढांक क्षेत्र के लिए 98.21 लाख, कोटद्वार शहरी क्षेत्र के लिए 99.62 लाख, शहर और भाबर के बीच के क्षेत्र रिगड्डी पार्ट वन क्षेत्र के लिए 99.42 लाख और रिगड्डी पार्ट टू क्षेत्र के लिए 98. 00 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन आज तक पाइप लाइन बिछाने के लिए जलसंस्थान को एक धेला तक नहीं मिला।
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लाइन लीकेज से सड़कें हो रही क्षतिग्रस्त
कोटद्वार। पूर्व में सड़कों के किनारे बिछाई गई पेयजल लाइन अब चौड़ीकरण होने के कारण सड़कों के बीचोंबीच आ गई है। जर्जर लाइन पानी का प्रेशर नहीं झेल पा रही है, जिससे सड़कों के बीचों बीच लीकेज के कारण गड्ढे बन गए हैं। गड्ढों से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जो दुर्घटना के सबब बने हुए हैं। आए दिन दो पहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। लोग विभाग को पेयजल लाइन लीकेज के लिए शिकायत कर रहे हैं, लेकिन बजट के अभाव में विभाग लाइनों पर जोड़कर किसी प्रकार काम चला रहा है।
पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने के लिए अभी किसी प्रकार का बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जर्जर पेयजल लाइनों के लीकेज की मरम्मत की जा रही है। प्रस्तावित बजट आने पर पुरानी पेयजल लाइनों को बदला जाएगा।
- संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान कोटद्वार