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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सच्चिदानंद भारती के जल संरक्षण कार्य की सराहना

Sun, 27 Jun 2021 06:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 06:27 PM IST
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Prime Minister Narendra Modi appreciated the water conservation work of Sachchidanand Bharti
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में जल और जंगल संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पौड़ी जिले के उफरैंखाल निवासी पर्यावरणविद् और सेवानिवृत्त शिक्षक सच्चिदानंद भारती के कार्यों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने उनके द्वारा जल संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। कहा कि अपने निजी प्रयासों से एक शिक्षक ने समाज को बड़ा संदेश दिया है, जो हमारी ताकत बनेगी।
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पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को सुनने के बाद उनका आभार जताया। भारती ने कहा कि प्रधानमंत्री ने करीब चार मिनट तक जल संरक्षण पर बात करते हुए उनका जिक्र किया, उत्तराखंड और गढ़वाल का सम्मान है। कहा कि प्रधानमंत्री तक उनकी बात पहुंचने के पीछे उन सभी लोगों की ताकत है, जो चाल-खाल बनाने और पाणी राखो आंदोलन को आगे बढ़ाने में मददगार रहे। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को हमेशा से सुनते आए हैं, लेकिन रविवार को सुबह तक उन्हें तनिक भी भान नहीं था कि प्रधानमंत्री उनके नाम और काम का जिक्र करेंगे।
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सच्चिदानंद भारती का कहना है कि जल, जंगल और जमीन के साथ प्रकृति हमारे जीवन का आधार है। केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि समस्त जीव सृष्टि इस पर निर्भर है। सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिसे हम जीवन श्रृखंला कहते हैं। यदि इसमें एक भी कड़ी टूटती है, तो समूचा जीवन प्रबंध बुरी तरह प्रभावित होता है।
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भारती को मिल चुका है ‘रजत की बूंदें’ नेशनल वाटर अवार्ड
बीरोंखाल ब्लाक के गाडखर्क गांव के मूल निवासी सच्चिदानंद भारती पिछले चार दशक से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनका पाणी राखो आंदोलन विश्व प्रसिद्ध है। पिछले कई सालों से कोटद्वार के भाबर स्थित घमंडपुर गांव में निवास कर रहे सच्चिदानंद भारती इंटर कालेज उफरैंखाल से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने वर्ष 1989 में बीरोंखाल के उफरैंखाल में अभियान को शुरू किया। इसके तहत उन्होंने क्षेत्र में करीब 30 हजार से अधिक चाल-खाल बनाए, जिन्हें उन्होंने ‘जल तलैया’ नाम दिया। उसके आसपास बांज, बुरांस और उत्तीस के पौधे लगाए। परिणाम यह हुआ कि 10 साल बाद सूखा गदेरा सदानीर नदी में बदल गया। जिसे उन्होंने ‘गाड गंगा’ नाम दिया। उनका कहना है कि चाल-खालों के निर्माण से प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर गंगा के अस्तित्व को बचाया जा सकता है। बीते मार्च में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जल संरक्षण और संवर्द्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए नमामि गंगे और नीर फाउंडेशन की ओर से ‘रजत की बूंदें’ नेशनल वाटर अवार्ड 2021 से भी सच्चिदानंद भारती सम्मानित हो चुके हैं।
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