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एनएसए डोभाल के गांव में उत्साह दोगुना
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Thu, 29 Sep 2016 10:02 PM IST
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पाक अधिकृत कश्मीर में सैन्य कार्रवाई से एक बार फिर चर्चा में आए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मूल रुप से पौड़ी जिले के घीड़ी गांव के निवासी हैं। पीओके में आतंकवादियों के ठिकानों का पता लगाने और स्पेशल फोर्स के सर्जिकल स्ट्राइक के रणनीतिकारों में डोभाल सबसे अहम माने जा रहे हैं।
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पीओके में डोभाल के निर्देशन में की गई सैन्य कार्रवाई से ग्रामीणों का उत्साह दोगुना हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के इस बेटे की रणनीति ने दुनिया को बता दिया कि हम किसी से कम नहीं। गौरतलब है कि 30 मई 2014 को ने एनएसए की जिम्मेदारी संभाली उसके बाद से विदेशी जमीन पर भारतीय सेना की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले म्यांमार में सेना ने घुसकर कर आतंकवादी ठिकानों का तबाह किया था।
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कोट ब्लाक के घीड़ी गांव (बनेलस्यूं पट्टी)में 20 जनवरी 1945 को जन्मे अजीत डोभाल के पिता गुणानंद डोभाल बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप में मेजर थे। अजीत ने कक्षा तीन तक की पढ़ाई गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से की। इसके बाद उनकी पढ़ाई सेना स्कूल में हुई। उन्होंने आगरा विवि से परास्नातक किया। 1968 में उन्हे आईपीएस में केरल कैडर मिला। चार साल पुलिस में सेवा देने के बाद वह इंटेलीजेंस में चले गए। वह ऐसे पहले पुलिस अफसर हैं, जिन्हें सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र मिला है।
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डोभाल के परिवार का आज भी गांव से नाता जुड़ा रहा है। उनके गांव में हर साल 22 जून को कुलदेवी बाल कुंवारी मंदिर में पूजा का आयोजन होता है। डोभाल ने जून 2015 में इस पूजा में भाग लिया था। एनएसए बनने के बाद भी गांव में वह सादगी से आए। वह बिना किसी तामझाम और सुरक्षा दस्तों के बजाय गिनती के सुरक्षा कर्मियों के साथ पहुंचे।
इससे पूर्व वह 1999 में गांव आए थे। ब्लाक प्रमुख कोट सुनील लिंगवाल का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के निर्देशन में पाकिस्तान की हरकतों का जो जवाब दिया गया है, उस पर कोट ब्लाक समेत पूरे देश को फक्र है। ग्राम प्रधान घीड़ी पुष्पा देवी और दामोदर प्रसाद का कहना है कि गांव के बेटे के इस पराक्रम से पूरे गांव में उल्लास है। अजीत के इस काम से घीड़ी गांव ही नहीं, पूरा प्रदेश गौरवान्वित हुआ है।