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नगर निगम कोटद्वार: वार्डों में आरक्षण की स्थिति को लेकर 179 आपत्तियां दर्ज
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कोटद्वार। इस बार के निकाय चुनाव में भी वार्डों में आरक्षण की स्थिति को यथावत रखे जाने से जनप्रतिनिधियों में शासन और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बनी है। ज्यादा आपत्तियां वार्डों में महिला आरक्षण को लेकर है। नगर निगम में अब तक 179 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। वार्ड 18 शिवपुर से सबसे अधिक 94 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। झंडीचौड़ पश्चिमी वार्ड से भी करीब 30 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आरक्षण की स्थिति को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने का शनिवार को अंतिम दिन है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य बुद्धि प्रकाश ने कहा कि वर्ष 2018 में हुए नगर निगम के पहले चुनाव में भी वार्ड नंबर-37 झंडीचौड़ पश्चिमी को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। इस बार पुन: इस सीट को एससी आरक्षित कर दिया गया है। कहा कि वार्ड में एससी की जनसंख्या 30 प्रतिशत से भी कम है। उनके वार्ड को एससी के लिए पुन: आरक्षित किए जाने से सामान्य वर्ग के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। कहा कि वह स्वयं भी आरक्षित वर्ग के हैं। उन्होंने उनके वार्ड को सामान्य सीट घोषित करने की मांग की है।
उधर, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भट्ट ने कहा कि नगर निगम चुनाव के लिए बनाई गई आरक्षण की सूची चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत है। वार्डों में आरक्षण को लेकर कोई नीतिगत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। कहा कि आरक्षण की सूची जारी करने से पूर्व प्रशासन की ओर से कोई वृहद सर्वे भी नहीं कराया गया। कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समुचित अवसर प्रदान करना है। सभी वार्डों में आरक्षण की स्थिति को यथावत रखा गया है। कहा कि मामले में जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।
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उधर, नगर आयुक्त वैभव गुप्ता ने कहा कि वार्डों में आरक्षण की स्थिति को लेकर 21 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराई जानी हैं। जिनका निस्तारण जिलाधिकारी के स्तर से होना हैं। अभी तक 179 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य बुद्धि प्रकाश ने कहा कि वर्ष 2018 में हुए नगर निगम के पहले चुनाव में भी वार्ड नंबर-37 झंडीचौड़ पश्चिमी को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। इस बार पुन: इस सीट को एससी आरक्षित कर दिया गया है। कहा कि वार्ड में एससी की जनसंख्या 30 प्रतिशत से भी कम है। उनके वार्ड को एससी के लिए पुन: आरक्षित किए जाने से सामान्य वर्ग के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। कहा कि वह स्वयं भी आरक्षित वर्ग के हैं। उन्होंने उनके वार्ड को सामान्य सीट घोषित करने की मांग की है।
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उधर, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भट्ट ने कहा कि नगर निगम चुनाव के लिए बनाई गई आरक्षण की सूची चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत है। वार्डों में आरक्षण को लेकर कोई नीतिगत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। कहा कि आरक्षण की सूची जारी करने से पूर्व प्रशासन की ओर से कोई वृहद सर्वे भी नहीं कराया गया। कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समुचित अवसर प्रदान करना है। सभी वार्डों में आरक्षण की स्थिति को यथावत रखा गया है। कहा कि मामले में जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।
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उधर, नगर आयुक्त वैभव गुप्ता ने कहा कि वार्डों में आरक्षण की स्थिति को लेकर 21 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराई जानी हैं। जिनका निस्तारण जिलाधिकारी के स्तर से होना हैं। अभी तक 179 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं।