{"_id":"615b2eeb8ebc3e6294460de9","slug":"lord-vishnu-broke-the-pride-of-narada-muni-kotdwar-news-drn392432810","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान विष्णु ने तोड़ा नारद मुनि का अभिमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान विष्णु ने तोड़ा नारद मुनि का अभिमान
विज्ञापन
दुगड्डा में आयोजित श्री रामलीला में नारद मोह का मंचन करते रंगकर्मी।
- फोटो : KOTDWAR
श्री रामलीला कमेटी दुगड्डा की ओर से आयोजित 121वीं रामलीला का मंचन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हो गई। रामलीला के पहले दिन रंगकर्मियों ने नारद मोह लीला का सजीव मंचन किया।
रविवार रात को श्री रामलीला का बतौर मुख्य अतिथि शिवदयाल बंसल और राम अवतार गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। प्रथम दृश्य में श्रीगणेश की झांकी आयोजित की गई। इसमें भजन गायक नरेंद्र शहनाई ने तेरी जय हो गणेश..भजन की प्रस्तुति देकर माहौल भक्तिमय किया। रामलीला में दिखाया गया कि नारद भ्रमण करते हुए एक स्थान पर पहुंचते हैं और ध्यान लाकर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से इंद्र का सिंहासन हिल उठता है जिससे वह भयभीत होकर कामदेव और अप्सराओं को नारद मुनि की तपस्या भंग करने भेजते हैं। कामदेव और अन्य अप्सराएं उनकी तपस्या को भंग नहीं कर पाते। कामदेव नारद मुनि के चरणों में गिर पड़ते हैं। नारद मुनि को लगता है कि उन्होंने बड़ा काम किया है, इससे उन्हें अभिमान आ जाता है। सभी लोग भगवान विष्णु से सहायता मांगते हैं, भगवान विष्णु नारद मुनि के अभिमान को तोड़ने के लिए लीला रचते हुए उनका अभिमान तोड़ते हैं।
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष गौरव सैलवाल, उपाध्यक्ष बबली बिष्ट, सचिव सौरभ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार, निर्देशक सोमप्रकाश, संजीव कोटनाला, संगीत निर्देशक जमन सिंह, संदीप रावत, प्रदीप बडोला, विपिन गुसाईं आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रविवार रात को श्री रामलीला का बतौर मुख्य अतिथि शिवदयाल बंसल और राम अवतार गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। प्रथम दृश्य में श्रीगणेश की झांकी आयोजित की गई। इसमें भजन गायक नरेंद्र शहनाई ने तेरी जय हो गणेश..भजन की प्रस्तुति देकर माहौल भक्तिमय किया। रामलीला में दिखाया गया कि नारद भ्रमण करते हुए एक स्थान पर पहुंचते हैं और ध्यान लाकर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से इंद्र का सिंहासन हिल उठता है जिससे वह भयभीत होकर कामदेव और अप्सराओं को नारद मुनि की तपस्या भंग करने भेजते हैं। कामदेव और अन्य अप्सराएं उनकी तपस्या को भंग नहीं कर पाते। कामदेव नारद मुनि के चरणों में गिर पड़ते हैं। नारद मुनि को लगता है कि उन्होंने बड़ा काम किया है, इससे उन्हें अभिमान आ जाता है। सभी लोग भगवान विष्णु से सहायता मांगते हैं, भगवान विष्णु नारद मुनि के अभिमान को तोड़ने के लिए लीला रचते हुए उनका अभिमान तोड़ते हैं।
विज्ञापन
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष गौरव सैलवाल, उपाध्यक्ष बबली बिष्ट, सचिव सौरभ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार, निर्देशक सोमप्रकाश, संजीव कोटनाला, संगीत निर्देशक जमन सिंह, संदीप रावत, प्रदीप बडोला, विपिन गुसाईं आदि मौजूद थे।
विज्ञापन