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सैन्य क्षेत्र योल छावनी बोर्ड से अलग करने का किया स्वागत
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हिमाचल में धर्मशाला से सटे सैन्य क्षेत्र योल को छावनी प्रशासन के दायरे से मुक्त करने के रक्षा मंत्रालय के निर्णय का नगरवासियों ने स्वागत करते हुए लैंसडौन छावनी को भी छावनी प्रशासन से मुक्त करने की मांग की है। मांग को लेकर नगरवासियों ने रक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है।
बुधवार को छावनी बोर्ड के सदस्य राजेश ध्यानी, इंद्रा रावत, पूर्व सदस्य महिपाल रावत, सामाजिक कार्यकर्ता संजय कन्नौजिया ने रक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में उन्होंने योल छावनी क्षेत्र की भांति लैंसडौन को भी छावनी प्रशासन के दायरे से अलग करने की वकालत की। कहा कि लैंसडौन ओर योल के लोग लंबे समय से अपने-अपने क्षेत्रों को छावनी प्रशासन से मुक्त कराने की मांग करते आ रहे थे। रक्षा मंत्रालय ने जनता की वर्षों पुरानी मांग पर योल को छावनी बोर्ड से अलग कर दिया है। इससे वहां के लोगों की मुराद पूरी हो गई है। अब रक्षा मंत्रालय को लैंसडौन को छावनी बोर्ड से अलग कर यहां के वाशिंदों के साथ भी न्याय करना चाहिए। कहा कि कड़े छावनी कानूनों के चलते छावनी के लोग पिछले 130 सालों से अन्याय व शोषण के शिकार हो रहे हैं और राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़े हुए हैं। लैंसडौन छावनी के लोग भी वर्षों से नगर को छावनी बोर्ड से अलग करने की मांग करते आ रहे हैं, ताकि उनकी परेशानियां दूर हो सकें। और राज्य व केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का लाभ लें सकें।
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बुधवार को छावनी बोर्ड के सदस्य राजेश ध्यानी, इंद्रा रावत, पूर्व सदस्य महिपाल रावत, सामाजिक कार्यकर्ता संजय कन्नौजिया ने रक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में उन्होंने योल छावनी क्षेत्र की भांति लैंसडौन को भी छावनी प्रशासन के दायरे से अलग करने की वकालत की। कहा कि लैंसडौन ओर योल के लोग लंबे समय से अपने-अपने क्षेत्रों को छावनी प्रशासन से मुक्त कराने की मांग करते आ रहे थे। रक्षा मंत्रालय ने जनता की वर्षों पुरानी मांग पर योल को छावनी बोर्ड से अलग कर दिया है। इससे वहां के लोगों की मुराद पूरी हो गई है। अब रक्षा मंत्रालय को लैंसडौन को छावनी बोर्ड से अलग कर यहां के वाशिंदों के साथ भी न्याय करना चाहिए। कहा कि कड़े छावनी कानूनों के चलते छावनी के लोग पिछले 130 सालों से अन्याय व शोषण के शिकार हो रहे हैं और राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़े हुए हैं। लैंसडौन छावनी के लोग भी वर्षों से नगर को छावनी बोर्ड से अलग करने की मांग करते आ रहे हैं, ताकि उनकी परेशानियां दूर हो सकें। और राज्य व केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का लाभ लें सकें।
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