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केटीआर में ई-सर्विलांस सिस्टम से रखेंगे तस्करों की घुसपैठ पर नजर

Fri, 11 Sep 2020 10:48 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2020 10:48 PM IST
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KTR will keep an eye on the intrusion of smugglers with the e-surveillance system
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से संवदेनशील कालागढ़ टाइगर रिजर्व (केटीआर) की उप्र से सटी पाखरों से कालागढ़ तक की दक्षिणी सीमा की निगरानी अब तीसरी आंख से होगी। केटीआर वन प्रभाग अपनी दक्षिणी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है। केटीआर में तीन ई-सर्विलांस टावर लगाने का काम अंतिम चरण में है। थर्मल और सीसीटीवी कैमरों से लैस ये टावर तस्करों और शिकारियों की घुसपैठ रोकने में कारगर साबित होंगे।
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कालागढ़ टाइगर रिजर्व (केटीआर), कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) का एक वन प्रभाग है, जो पौड़ी गढ़वाल जिले में कोटद्वार से 25 किमी दूर पाखरो से लेकर सोनानदी, मंदाल, मैदावन, अदनाला और प्लेन रेंजों तक 66626.20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है। छह रेंज वाला केटीआर वन प्रभाग वन्यजीव बहुल भूभाग है, जिसकी सुरक्षा वन आरक्षी से लेकर रेंज अधिकारियों के कंधों पर है। यूपी से सटी दक्षिणी सीमा से वन तस्करों और शिकारियों की घुसपैठ की यहां आशंका रहती है, जिस पर अंकुश लगाने के लिए कार्बेट पार्क की तर्ज पर यहां तीन बड़े ई-सर्विलांस सिस्टम टावर धौलखंड, कमलावन और गूजरस्रोत में स्थापित कर दिए गए हैं। एक टावर पर दो थर्मल नाइटविजन कैमरे स्थापित किए जाएंगे। सर्विलांस सिस्टम के जरिए पूरी दक्षिणी सीमा पर इसके लैंसडौन और कोटद्वार स्थित मुख्यालय से ही नजर रखी जा सकेगी। कार्बेट में यह सिस्टम गत वर्ष जुलाई माह में स्थापित हो चुका है। सहायक प्रभागीय वनाधिकारी एलआर नाग बताते हैं कि इसका रेडियो ट्रांसमिशन विदेश से मंगवाया गया है। मौसम की खराबी भी इनकी बाधा नहीं बन सकेगी। इस यह सर्विलांस सिस्टम से आवास स्थल की मैपिंग, वन्यजीवों के क्षेत्रों व उनकी गतिविधियों के अध्ययन जैसे डेटा की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। ये कैमरे गर्मी को भी भांप लेते हैं, जिससे यह पता लगाना भी आसान होगा कि कौन से क्षेत्र में आग लगी हैं और यह कहां तक फैली है। कालागढ़ वन प्रभाग के डीएफओ अखिलेश तिवारी का कहना है कि ई-सर्विलांस सिस्टम से केटीआर क्षेत्र में होने वाली घुसपैठ को तो रोकने में मदद मिलेगी, इससे जंगलों को आग से भी बचाया जा सकेगा।
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क्या है इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम
इसमें छोटी रेंज के इंफ्रारड और लंबी रेंज के नाइटविजन थर्मल कैमरे चोटियों पर लगाए जाते हैं। सभी कैमरे आपस में जुड़े रहते हैं जो केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से वायरमैकस से संचालित होते हैं। इन कैमरों से दूर की फोटो को जूम करने की अत्यधिक क्षमता 360 डिग्री रोटेशन और विपरीत मौसम में भी कार्य करने की क्षमता होती है। संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के साथ ही 20 किलोग्राम से अधिक वजन की वस्तु का पता लगाने के साथ ही यह कोई भी संदिग्ध गतिविधि होने पर चेतावनी जारी करता है और सूचना सभी केंद्रों को प्रसारित हो जाती है।
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