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कर्णप्रयाग रेल निर्माण की प्रक्रिया शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Fri, 22 Apr 2016 10:39 PM IST
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग निर्माण से समाज पर पडने वाले प्रभावों और समस्याओं के समाधान के लिए सामाजिक समाघात निर्धारण (सोशल इंपेक्ट असेसमेंट) प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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जिलों से आंकड़े मिलने के बाद सर्वेक्षणकर्ता एक-दो दिन के भीतर प्रभावित 45 गांवों में सर्वेक्षण शुरू कर देेंगे। पूरी प्रक्रिया को छह माह की अवधि में पूर्ण किया जाना चाहिए। एसआईए के पश्चात निजी नाप भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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यहां बता दे कि रेल मार्ग के सर्वेक्षण के पश्चात आरवीएनएल (रेल विकास निगम लि.) ने अपने स्तर से लगभग आठ माह पूर्व भू अधिग्रहण संबंधी प्रारंभिक कार्रवाई पूर्ण कर ली है। लेकिन राज्य स्तर से सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन नीति और केंद्र की ओर से पारित भूमि अर्जन, पुनर्वासन में उचित प्राधिकार का अधिकार अधिनियम 2013 के लागू नहीं होने के कारण निजी नाप भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अटकी हुई है।
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लंबी प्रतीक्षा के पश्चात विगत 2 फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट ने सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन नीति को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद एसआईए प्रक्रिया पर शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई। शासन ने एसआईए सर्वेक्षण की जिम्मेदारी केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर और श्री गुरु राम पीजी कालेज देहरादून को दी है। दोनों संस्थानों को तीन माह के भीतर सर्वेक्षण कार्य और रिपोर्ट जिला प्राधिकरण को सौंपनी होगी।
चार जिलों में होगा सर्वेक्षण
रेल मार्ग में चार जिलों की भूमि आ रही है। केंद्रीय विवि श्रीनगर का समाज कार्य विभाग चमोली के 5, रुद्रप्रयाग के 10 और पौड़ी के 17 गांवों में सर्वेक्षण करेगा। जबकि टिहरी जिले के 13 गांवों का सर्वेक्षण गुरुराम पीजी कालेज करेगा।
सर्वेक्षण टीम को ग्राम पंचायत में बैठक, प्रश्नोत्तरी,घर-घर सर्वेक्षण और ग्राम सर्वेक्षण सहित रेल मार्ग से पडने वाले प्रभावों और समाधानों पर चर्चा करनी होगी। सर्वेक्षण कार्य दो माह चलेगा। जबकि एक माह में रिपोर्ट बनानी होगी।
छह माह में एसआइए प्रक्रिया पूरी होनी है। तीन माह में सर्वेक्षण संबंधी कार्य पूरे होने हैं। सर्वेक्षण के पश्चात सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी मूल्यांकन करेगी। इस रिपोर्ट का जिलाधिकारी और शासन से अनुमोदन के बाद फाइनल योजना तैयार हो जाएगी। -डा. एसके बरनवाल, डीजीएम आरवीएनएल
लगभग 5 लोगों की टीम एसआईए सर्वेक्षण कार्य करेगी। सर्वेक्षण से पूर्व जिलाधिकारियों के साथ बैठक रखी गई है। सर्वेक्षण सर्वे रिपोर्ट को निर्धारित फार्मेट में भरा जाना है। -प्रो. जेपी पचौरी, एचओडी समाज कार्य विभाग