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बूंखाल कालिंका मेले की तैयारियों में जुटा
ब्यूरो/अमर उजाला,कोटद्वार।
Updated Wed, 30 Nov 2016 09:36 PM IST
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बूंखाल कालिंका मंदिर में लगने वाला वार्षिक मेला तीन दिसंबर को
- फोटो : अमर उजाला
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थलीसैंण ब्लाक के राठ क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बूंखाल कालिंका मंदिर में लगने वाला वार्षिक मेला तीन दिसंबर को निश्चित हुआ है। इस वर्ष भी भूमि मालिकों ने कालिंका के मुख्य पुजारी रमेश गोदियाल से मेले का दिन मांगा और विधिवत पंचांग के अनुसार यह दिन तीन दिसंबर तय हुआ है।
आज से पांच वर्ष पूर्व तक बूंखाल मेले में पशुओं की बड़ी तादाद में सामूहिक बलि चढ़ाई जाती थी। इस पर वर्ष 2012 से पूरी तरह रोक लग चुकी है। पशुओं की बलि की जगह अब मां कालिंका की देव डोलियां गांव-गांव से ढोल दमाऊं की थाप पर नाचते नाचते देवी भक्त लाते हैं। पहली बार डोलियों को लाने की शुरुआत डांडी कांठी संस्था के प्रमुख राकेश खंकरियाल ने की।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल ने बताया कि पूरे दिन माता की पूजा-अर्चना कालिंका पाठ, हवन, देव डोलियों की पूजा के अलावा कई कालिका भक्तों की ओर से सार्वजनिक भंडारे का भी आयोजन होगा।
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आज से पांच वर्ष पूर्व तक बूंखाल मेले में पशुओं की बड़ी तादाद में सामूहिक बलि चढ़ाई जाती थी। इस पर वर्ष 2012 से पूरी तरह रोक लग चुकी है। पशुओं की बलि की जगह अब मां कालिंका की देव डोलियां गांव-गांव से ढोल दमाऊं की थाप पर नाचते नाचते देवी भक्त लाते हैं। पहली बार डोलियों को लाने की शुरुआत डांडी कांठी संस्था के प्रमुख राकेश खंकरियाल ने की।
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सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल ने बताया कि पूरे दिन माता की पूजा-अर्चना कालिंका पाठ, हवन, देव डोलियों की पूजा के अलावा कई कालिका भक्तों की ओर से सार्वजनिक भंडारे का भी आयोजन होगा।
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