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कालागढ़ के स्टेटस पर दो सप्ताह में देनी होगी एनजीटी को रिपोर्ट
कालागढ़/कोटद्वार
Updated Fri, 29 Jan 2016 10:02 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रामगंगा बांध परियोजना निर्माण के लिए कालागढ़ में दी गई वन भूमि वन विभाग को लौटाने की कवायद तेज हो गई है। इस बारे में गठित अधिकारियों की समिति कालागढ़ में जमीन और रिहायशी स्टेटस को लेकर दो सप्ताह में एनजीटी को रिपोर्ट सौंप देगी। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि तीन दिन तक समिति के सदस्यों ने कालागढ़ में रहकर वहां की स्थिति का पूरा मूल्यांकन कर लिया है।
एनजीटी की प्रमुख बैंच के आदेश पर समिति ने कालागढ़ पर तीन दिवसीय रिपोर्ट तैयार की है। समिति के नोडल अधिकारी सीटीआर के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि एनजीटी के दिशा-निर्देश पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने कालागढ़ पहुंचकर कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में बैठक की। एनजीटी ने कार्बेट टाइगर रिजर्व में ढांचे की स्थिति, वर्तमान स्थिति, वन गतिविधियों के विकास, वन्यजीवों के लाभ के लिए उपयोगिता जानने के आदेश दिए थे, जिस पर यहां के सभी भवनों, उनके आधिपत्य आदि का डाटा तैयार किया गया है। इसे दो सप्ताह में एनजीटी में रखा जाएगा। आठ फरवरी को पुन: एनजीटी में इसकी सुनवाई होगी। तीन दिन की इस बैठक के दौरान सिंचाई विभाग और वन विभाग ने यहां बने समस्त भवनों की भौतिक स्थिति को कैमरों में कैद किया है। टीम के सदस्यों के निर्देश पर भवनों की नापजोख भी की गई।
यह है मामला
रामगंगा बांध परियोजना के लिए 1960 के दशक में वन विभाग से भूमि लेकर यहां अधिकारियों और कर्मियों के लिए लगभग साढ़े पांच हजार आवास, अनेक अनावासीय भवन, बैंक, डाकघर, स्कूल, कॉलेज, मनोरंजन क्लब, हाइडिल कॉलोनी आदि बनाई गई थी। परियोजना के निर्माण के बाद से 1995 में वन विभाग की भूमि को वापस लेने के लिए एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में कालागढ़ की शेष भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने के आदेश दिए हैं। आदेशों का पालन न होने पर अब मामला एनजीटी में विचाराधीन है। उधर, नगर में रह रहे लोगों ने भी एनजीटी से पुनर्वास की गुहार लगाई है, जिस पर नगर में रह रहे नागरिकों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
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यह है समस्या
लगभग 50 वर्ष के दौरान कालागढ़ में आवासों में कार्बेट टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, परियोजना के छंटनीशुदा, सेवानिवृत्त कर्मियों, बाजारों के व्यापारियों, परियोजना के ठेकेदारों के कर्मी निवास कर रहे है। भूमि वन विभाग को लौटाने के निर्णय के बाद उनमें अपने भविष्य को लेकर असमंजस बना है।
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एनजीटी की प्रमुख बैंच के आदेश पर समिति ने कालागढ़ पर तीन दिवसीय रिपोर्ट तैयार की है। समिति के नोडल अधिकारी सीटीआर के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि एनजीटी के दिशा-निर्देश पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने कालागढ़ पहुंचकर कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में बैठक की। एनजीटी ने कार्बेट टाइगर रिजर्व में ढांचे की स्थिति, वर्तमान स्थिति, वन गतिविधियों के विकास, वन्यजीवों के लाभ के लिए उपयोगिता जानने के आदेश दिए थे, जिस पर यहां के सभी भवनों, उनके आधिपत्य आदि का डाटा तैयार किया गया है। इसे दो सप्ताह में एनजीटी में रखा जाएगा। आठ फरवरी को पुन: एनजीटी में इसकी सुनवाई होगी। तीन दिन की इस बैठक के दौरान सिंचाई विभाग और वन विभाग ने यहां बने समस्त भवनों की भौतिक स्थिति को कैमरों में कैद किया है। टीम के सदस्यों के निर्देश पर भवनों की नापजोख भी की गई।
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यह है मामला
रामगंगा बांध परियोजना के लिए 1960 के दशक में वन विभाग से भूमि लेकर यहां अधिकारियों और कर्मियों के लिए लगभग साढ़े पांच हजार आवास, अनेक अनावासीय भवन, बैंक, डाकघर, स्कूल, कॉलेज, मनोरंजन क्लब, हाइडिल कॉलोनी आदि बनाई गई थी। परियोजना के निर्माण के बाद से 1995 में वन विभाग की भूमि को वापस लेने के लिए एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में कालागढ़ की शेष भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने के आदेश दिए हैं। आदेशों का पालन न होने पर अब मामला एनजीटी में विचाराधीन है। उधर, नगर में रह रहे लोगों ने भी एनजीटी से पुनर्वास की गुहार लगाई है, जिस पर नगर में रह रहे नागरिकों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
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यह है समस्या
लगभग 50 वर्ष के दौरान कालागढ़ में आवासों में कार्बेट टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, परियोजना के छंटनीशुदा, सेवानिवृत्त कर्मियों, बाजारों के व्यापारियों, परियोजना के ठेकेदारों के कर्मी निवास कर रहे है। भूमि वन विभाग को लौटाने के निर्णय के बाद उनमें अपने भविष्य को लेकर असमंजस बना है।