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Kotdwar News: उत्तराखंड व यूपी के वन अधिकारी वन्यजीव अपराधों पर अंकुश के लिए करेंगे संयुक्त प्रयास

Thu, 25 Sep 2025 10:34 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 25 Sep 2025 10:34 PM IST
सार

कोटद्वार में कॉर्बेट, कालागढ़, लैंसडौन और बिजनौर के वन अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें वन्यजीव अपराध रोकने के लिए ई-सर्विलांस, संयुक्त गश्त और सूचना साझा करने पर सहमति बनी। ग्रामीणों को भी संरक्षण से जोड़ने की पहल की गई।

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Forest officials from Uttarakhand and Uttar Pradesh will make joint efforts to curb wildlife crimes.

विस्तार

कोटद्वार। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, कालागढ़ टाइगर रिजर्व, लैंसडौन एवं यूपी के बिजनौर वन प्रभाग समेत सभी वन अधिकारियों की कोटद्वार में अंतरराज्यीय सहयोग बैठक हुई। जिसमें वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, ई-सर्विलांस, रियल टाइम इन्फॉरमेशन शेयरिंग पर सहमति बनी है। सभी प्रभाग मिलकर इसके लिए कार्य करेंगे और जिला प्रशासन व पुलिस से भी सहयोग लिया जाएगा। बैठक में इसके लिए एक्शन प्लान भी तैयार किया गया। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के निरीक्षक अरनब बोस ऑनलाइन बैठक से जुड़े। इससे पूर्व चारों डिविजनों के अधिकारियों ने बाॅर्डर पर स्थित कोटद्वार के काशीरामपुर तल्ला में संयुक्त गश्त भी की।
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बैठक में कालागढ़ के डीएफओ तरुण एस ने बताया कि यह नई शुरुआत है और इसे चारों वन प्रभाग मिलकर शुरू करने जा रहे हैं। इसके तहत खोजी कुत्ते, ट्रैंकुलाइज टीम और स्टाफ के लिए संयुक्त ट्रेनिंग प्रोग्राम आदि उपलब्ध संसाधनों को साझा किया जाएगा। संयुक्त मॉनिटरिंग कमेटी, मासिक व छमाई रिव्यू मीटिंग कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। रेगुलर पेट्रोलिंग के साथ ही ई-सर्विलांस, रियल टाइम इनफॉरमेशन के साथ ही मेपिंग भी की जाएगी। सघन वनों में सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी।
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बिजनौर वन प्रभाग के डीएफओ अभिनव राज ने कहा कि वाइल्ड लाइफ क्राइम को ह्यूमन ट्रैफिकिंग, स्मैक तस्करी समेत अन्य अपराधों की तरह ही जघन्य अपराध माना जाना चाहिए। जंगल में रह रहे व आबादी क्षेत्र में सूचना तंत्र को और विकसित किया जाएगा। यूपी क्षेत्र में बरेली व मुरादाबाद की टीमों की मदद भी ली जाएगी। डीएफओ व फील्ड स्टाफ स्तर पर सभी डिवीजन सूचनाओं का आदान प्रदान करेंगे व तुरंत एक्शन भी लेंगे। कहा कि चिड़ियापुर से लेकर अमानगढ़ तक 20 से अधिक वन गुर्जरों के डेरे हैं और इस क्षेत्र में रास्ते व जनसंख्या ज्यादा है।
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बैठक में वन क्षेत्र से सटे ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए रोजगार परक कार्यक्रम शुरू करने व ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की पहल पर सहमति जताई गई। बैठक में केटीआर के उप निदेशक राहुल मिश्रा, लैंसडौन के डीएफओ जीवन मोहन जगाड़े, बिजनौर के डीएफओ अभिनव राज, एसडीओ शिप्रा वर्मा, बिंदरपाल, पाखरो के रेंजर आशीष मोहन तिवारी, सर्पदूली रेंज के रेंजर नंद किशोर रूबाली आदि मौजूद रहे।
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