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भाबर में हाथी, पहाड़ में गुलदार और भालू की दहशत
कोटद्वार
Updated Sun, 28 Feb 2016 10:04 PM IST
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लैंसडौन वन प्रभाग के पर्वतीय क्षेत्र और मैदानी इलाकों में मनुष्य का वन्यजीवों के साथ संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन के मानव-वन्यजीव संघर्ष से स्थिति कहीं विस्फोटक बनकर रिखणीखाल प्रखंड के धामधार प्रकरण जैसी न हो, सरकारी मशीनरी को समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। मैदानी क्षेत्र में जहां ग्रामीणों को हाथी का उत्पात झेलना पड़ रहा है, वहीं पहाड़ में कहीं गुलदार तो कहीं भालू से संघर्ष हो रहा है।
यमकेश्वर ब्लाक में पिछले वर्ष नवंबर माह में गुलदार ने दो मासूमों को मार डाला था, तब विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यमकेश्वर के साथ ही द्वारीखाल, दुगड्डा, नैनीडांडा, रिखणीखाल और जयहरीखाल विकासखंडों में गुलदार के साथ ही भालू का आतंक व्याप्त है। भालू के हमले में घायल होने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं, जो चारापत्ती और ईंधन की तलाश में क्षेत्र के जंगलों में जाने के लिए मजबूर रहती हैं। भालू के हमले के घायल होने के दो दर्जन से ज्यादा मामले प्रकाश में आए हैं। चार फरवरी को कल्जीखाल के सरक्याणा गांव में घर के आंगन में खेलते हुए सात साल के बच्चे सुमित को गुलदार ने मार डाला था, वहीं महीने का अंतिम सप्ताह में रविवार को जयहरीखाल ब्लाक के ओडल गांव में गुलदार ने पांच साल की बच्ची गौरी को मार डाला।
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गुलदार के हमले के मामले
16 नवंबर, 2015-लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज में अमोला के जंगल में वन गुर्जर के चार साल के बेटे को आंगन से उठाकर गुलदार ने मार डाला।
23 नवंबर, 2015-लालढांग रेंज के यमकेश्वर क्षेत्र में धारकोट गढ़ाकोट गांव में आठ साल की मासूम संतोषी की गुलदार के हमले में मौत हो गई थी। वन विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर मौत के घाट उतार दिया।
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कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव, हाथी नहीं कर पा रहे सड़क पार
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। रवासन-सोनानदी कॉरिडोर में पड़ने वाले मोटर मार्गों पर बढ़ता यातायात का दबाव और जंगलों में मानवीय दखल बढ़ने से लैंसडौन वन प्रभाग में भी हाथियों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। लैंसडौन वन प्रभाग से सटे कोटद्वार भाबर के गांवों में हाथी का उत्पात कोई नया नहीं है। जंगलों में हाथी कई लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। जंगलों में बढ़ते मानवीय दखल से हाथियों का व्यवहार सामान्य नहीं रह गया है। मनुष्य को देखते ही वे हमलावर हो जा रहे हैं। कोटद्वार-दुगड्डा के बीच मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे रवासन-सोनानदी ऐलीफेंट कॉरिडोर से गुजरता है। सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण हाथियों की आवाजाही प्रभावित होती है। यही वजह है कि हाल के दिनों में इस इलाके में हाथियों के हमले भी बढ़ रहे हैं। डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी का कहना है कि आम तौर पर यहां के हाथी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमला करते हैं। विभाग इस ओर समुचित कदम उठा रहा है। लोगों को जंगल में जाने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग में हुए हाथी के प्रमुख हमले
1. 22 मार्च, 2012 लालढांग रेंज में जयदेवपुर सिगड्डी निवासी एक महिला को हाथी ने पटककर मार डाला।
2. 30 मई, 2013- कोटद्वार रेंज की ग्वालगढ़ बीट में जगदेव मंदिर के पास जंगल में घास-पत्ती लेेने गए एक व्यक्ति को हाथी ने कुचल डाला, मौत।
3. 05 दिसंबर, 2014 को कोटद्वार रेंज में सत्तीचौड़ निवासी महिला विजयलक्ष्मी (50) पत्नी शंभूप्रसाद भट्ट को मालन ब्लाक के जंगल में हाथी ने हमला कर घायल किया।
4. 10 दिसंबर, 2014 आमपड़ाव स्थित वाल्मीकि नगर निवासी वृद्धा लीला देवी (70) पत्नी स्व. जगदीश को डिग्री कालेज के पीछे के जंगल में हाथी ने कुचल डाला, मौत।
5. 20 दिसंबर, 2014 को सत्तीचौड़ के जंगल में घासपत्ती लेने गई महिला बीना देवी पत्नी उत्तम सिंह निवासी पदमपुर को हाथी ने दौड़ाकर घायल किया।
6. 11 जनवरी, 2015-सुखरौ के जंगल में घासपत्ती लेने गई शिवपुर निवासी एक महिला को हाथी ने दौड़ाया, घायल।
7. 20 जनवरी, 2015-कोटड़ी रेंज में कार्यरत वन दारोगा भारत सिंह रावत को गश्त के दौरान हथिनी ने पटककर मार डाला।
8. 19 सितंबर, 2015- कुंभीचौड़ निवासी महिला सुनीता अधिकारी (33) पत्नी कैलाश अधिकारी को सनेह के जंगल में हाथी ने मार डाला।
9. 11 नवंबर, 2015- कालागढ़ टाइगर रिजर्व के सोनानदी रेंज में लकड़ी लेने गए अनीश (50) निवासी बढ़ापुर को मौत के घाट उतारा।
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यमकेश्वर ब्लाक में पिछले वर्ष नवंबर माह में गुलदार ने दो मासूमों को मार डाला था, तब विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यमकेश्वर के साथ ही द्वारीखाल, दुगड्डा, नैनीडांडा, रिखणीखाल और जयहरीखाल विकासखंडों में गुलदार के साथ ही भालू का आतंक व्याप्त है। भालू के हमले में घायल होने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं, जो चारापत्ती और ईंधन की तलाश में क्षेत्र के जंगलों में जाने के लिए मजबूर रहती हैं। भालू के हमले के घायल होने के दो दर्जन से ज्यादा मामले प्रकाश में आए हैं। चार फरवरी को कल्जीखाल के सरक्याणा गांव में घर के आंगन में खेलते हुए सात साल के बच्चे सुमित को गुलदार ने मार डाला था, वहीं महीने का अंतिम सप्ताह में रविवार को जयहरीखाल ब्लाक के ओडल गांव में गुलदार ने पांच साल की बच्ची गौरी को मार डाला।
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गुलदार के हमले के मामले
16 नवंबर, 2015-लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज में अमोला के जंगल में वन गुर्जर के चार साल के बेटे को आंगन से उठाकर गुलदार ने मार डाला।
23 नवंबर, 2015-लालढांग रेंज के यमकेश्वर क्षेत्र में धारकोट गढ़ाकोट गांव में आठ साल की मासूम संतोषी की गुलदार के हमले में मौत हो गई थी। वन विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर मौत के घाट उतार दिया।
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कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव, हाथी नहीं कर पा रहे सड़क पार
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। रवासन-सोनानदी कॉरिडोर में पड़ने वाले मोटर मार्गों पर बढ़ता यातायात का दबाव और जंगलों में मानवीय दखल बढ़ने से लैंसडौन वन प्रभाग में भी हाथियों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। लैंसडौन वन प्रभाग से सटे कोटद्वार भाबर के गांवों में हाथी का उत्पात कोई नया नहीं है। जंगलों में हाथी कई लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। जंगलों में बढ़ते मानवीय दखल से हाथियों का व्यवहार सामान्य नहीं रह गया है। मनुष्य को देखते ही वे हमलावर हो जा रहे हैं। कोटद्वार-दुगड्डा के बीच मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे रवासन-सोनानदी ऐलीफेंट कॉरिडोर से गुजरता है। सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण हाथियों की आवाजाही प्रभावित होती है। यही वजह है कि हाल के दिनों में इस इलाके में हाथियों के हमले भी बढ़ रहे हैं। डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी का कहना है कि आम तौर पर यहां के हाथी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमला करते हैं। विभाग इस ओर समुचित कदम उठा रहा है। लोगों को जंगल में जाने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग में हुए हाथी के प्रमुख हमले
1. 22 मार्च, 2012 लालढांग रेंज में जयदेवपुर सिगड्डी निवासी एक महिला को हाथी ने पटककर मार डाला।
2. 30 मई, 2013- कोटद्वार रेंज की ग्वालगढ़ बीट में जगदेव मंदिर के पास जंगल में घास-पत्ती लेेने गए एक व्यक्ति को हाथी ने कुचल डाला, मौत।
3. 05 दिसंबर, 2014 को कोटद्वार रेंज में सत्तीचौड़ निवासी महिला विजयलक्ष्मी (50) पत्नी शंभूप्रसाद भट्ट को मालन ब्लाक के जंगल में हाथी ने हमला कर घायल किया।
4. 10 दिसंबर, 2014 आमपड़ाव स्थित वाल्मीकि नगर निवासी वृद्धा लीला देवी (70) पत्नी स्व. जगदीश को डिग्री कालेज के पीछे के जंगल में हाथी ने कुचल डाला, मौत।
5. 20 दिसंबर, 2014 को सत्तीचौड़ के जंगल में घासपत्ती लेने गई महिला बीना देवी पत्नी उत्तम सिंह निवासी पदमपुर को हाथी ने दौड़ाकर घायल किया।
6. 11 जनवरी, 2015-सुखरौ के जंगल में घासपत्ती लेने गई शिवपुर निवासी एक महिला को हाथी ने दौड़ाया, घायल।
7. 20 जनवरी, 2015-कोटड़ी रेंज में कार्यरत वन दारोगा भारत सिंह रावत को गश्त के दौरान हथिनी ने पटककर मार डाला।
8. 19 सितंबर, 2015- कुंभीचौड़ निवासी महिला सुनीता अधिकारी (33) पत्नी कैलाश अधिकारी को सनेह के जंगल में हाथी ने मार डाला।
9. 11 नवंबर, 2015- कालागढ़ टाइगर रिजर्व के सोनानदी रेंज में लकड़ी लेने गए अनीश (50) निवासी बढ़ापुर को मौत के घाट उतारा।