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Kotdwar News: दुगड्डा के नाथूपुर में फिर धमके हाथी, ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर

Sat, 06 Apr 2024 10:06 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 06 Apr 2024 10:06 PM IST
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Elephants again threaten Duggada's Nathupur, villagers forced to wake up
दुगड्डा/कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सिमलचौड़ के गांवों में बीते एक माह से चल रहा हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार रात को एक बार फिर तीन हाथियों का झुंड नाथूपुर गांव में आ धमका। इससे ग्रामीणों में दहशत रही। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर खदेड़ा। लेकिन शनिवार सुबह हाथी फिर से धमक गए और गांव में बागवानी और चारा पत्ती के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया।
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नाथूपुर निवासी जगमोहन सिंह, चंद्रमोहन सिंह, बृजमोहन सिंह, हिमांशु, रेखा देवी और कुसुमा देवी आदि ने बताया कि शुक्रवार की शाम पांच बजे के करीब एक बार फिर हाथियों का झुंड गांव में धमक गया। इस दौरान हाथियों ने ग्रामीणों के आम और केले की बागवानी को तहस-नहस कर डाला। साथ ही चारा पत्ती के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया। हाथियों के झुंड के ग्रामीणों के आवास के बिल्कुल नजदीक आने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना पर गांव पहुंचे वनकर्मियों ने पटाखे फोड़कर हाथियों को खदेड़ा। शनिवार सुबह तड़के दो हाथी पुन: गांव में आवासीय भवनों के नजदीक धमक गए। ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर और कनस्तर बजाकर करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। कहा कि हाथियों के झुंड में एक डेढ़ दांत का टस्कर भी है, जो काफी आक्रामक है और भगाने पर वह लोगों के पीछे दौड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने मंदिर से लेकर ग्रामीणों के आवास तक कई आम और केले के पौधे तोड़ डाले। इसके अलावा गींठी, भीमल, सांदण, गूलर और तिमला आदि चारा पत्ती के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने गांव में बनी सिंचाई नहर और पेयजल टैंक भी क्षतिग्रस्त कर डाला। हाथी के वजन से पेयजल टैंक की दीवार भी धंस गई। हाथियों की धमक के कारण गांव में पशु चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने वन विभाग से हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर जंगल में खदेड़ने और नियमित रूप से गश्त करने की मांग की है।
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उधर, रेंजर प्रमोद डोबरियाल ने बताया कि क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में आहार और पीने के लिए पानी होने के कारण हाथियों की मूवमेंट नाथूपुर और इसके आसपास के गांवों में बनी हुई है। उन्होंने ग्रामीणों से पैदल आवाजाही के दौरान सतर्कता बरतने और झुंड में ही आवाजाही करने की अपील की है।
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