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Kotdwar News: सिद्धपीठ कालिंका मंदिर में लगे जतोड़ा मेले में उमड़े श्रद्धालु
Sat, 06 Dec 2025 07:24 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 06 Dec 2025 07:24 PM IST
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प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आयोजित होता है धार्मिक मेला
बैजरो (बीरोंखाल)। पौड़ी गढ़वाल व अल्मोड़ा जिले की सीमा पर स्थित सिद्धपीठ कालिंका मंदिर में जतोड़ा मेले का आयोजन किया गया। कई श्रद्धालुओं ने भगवती कालिंका व न्याजा (मां भगवती का स्वरूप) के दर्शन किए।
ललित बडियारी (लैली बूबा) की ओर से सबसे पहले अपने सपने में मां के दर्शन के बाद छोटा सा स्थान बनाकर पूजा शुरू की गई थी। कालिंका बडियारी रावत जाति की कुल देवी है। जखोला थलीसैंण के ममगाईं ब्राह्मण इसके पुजारी हैं। वर्तमान में गढ़वाल व कुमाऊं में बडियारी रावत जाति के 11 गांव हैं।
मां कालिंका का थान बीरोंखाल के ग्राम कोठा में है। बीते 1 दिसंबर की सुबह भगवान सूर्य देव की पहली किरण के साथ न्याजा अपने गर्भगृह ग्राम कोठा (बंदरकोट) से बाहर आईं और पांच दिसंबर तक भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए उनके गांवों के भ्रमण पर रही। इस दौरान न्याजा बडियारी रावत के वंशजों के गांव व वहां स्थित मंदिरों में भ्रमण करती हुई शनिवार को मंदिर प्रांगण में पहुंची।
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सिद्धपीठ कालिंका मंदिर 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार लगने वाले मेले में बडियारी वंशजों की दीशा ध्याणी परिवार सहित यहां दर्शन करने के लिए पहुंचे। शनिवार को गढ़वाल के बीरोंखाल, जोगीमढी, रसिया महादेव, स्यूंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से मेले में हजारों श्रद्धालु उमड़े थे।
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बैजरो (बीरोंखाल)। पौड़ी गढ़वाल व अल्मोड़ा जिले की सीमा पर स्थित सिद्धपीठ कालिंका मंदिर में जतोड़ा मेले का आयोजन किया गया। कई श्रद्धालुओं ने भगवती कालिंका व न्याजा (मां भगवती का स्वरूप) के दर्शन किए।
ललित बडियारी (लैली बूबा) की ओर से सबसे पहले अपने सपने में मां के दर्शन के बाद छोटा सा स्थान बनाकर पूजा शुरू की गई थी। कालिंका बडियारी रावत जाति की कुल देवी है। जखोला थलीसैंण के ममगाईं ब्राह्मण इसके पुजारी हैं। वर्तमान में गढ़वाल व कुमाऊं में बडियारी रावत जाति के 11 गांव हैं।
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मां कालिंका का थान बीरोंखाल के ग्राम कोठा में है। बीते 1 दिसंबर की सुबह भगवान सूर्य देव की पहली किरण के साथ न्याजा अपने गर्भगृह ग्राम कोठा (बंदरकोट) से बाहर आईं और पांच दिसंबर तक भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए उनके गांवों के भ्रमण पर रही। इस दौरान न्याजा बडियारी रावत के वंशजों के गांव व वहां स्थित मंदिरों में भ्रमण करती हुई शनिवार को मंदिर प्रांगण में पहुंची।
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सिद्धपीठ कालिंका मंदिर 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार लगने वाले मेले में बडियारी वंशजों की दीशा ध्याणी परिवार सहित यहां दर्शन करने के लिए पहुंचे। शनिवार को गढ़वाल के बीरोंखाल, जोगीमढी, रसिया महादेव, स्यूंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से मेले में हजारों श्रद्धालु उमड़े थे।