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बिलों से रायल्टी वसूलने के विरोध में सड़कों पर उतरे ठेकेदार
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पर्वतीय ठेकेदार संघ से जुड़े ठेकेदारों ने निर्माण कार्यों के बिलों में वसूली जाने वाली रॉयल्टी के विरोध में शनिवार को नगर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रदेश सरकार से निर्माण कार्य के लिए उपयोग में लाए जाने वाले उप खनिज के लिए एमएम-11 और फॉर्म जे की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की गई। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन प्रेषित भी किया।
शनिवार को पर्वतीय ठेकेदार संघ से जुड़े ठेकेदार लोनिवि गेस्ट हाउस में एकत्र हुए। यहां से उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नगर में जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए तहसील पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुलवीर कोठियाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ठेकेदारों ने ज्ञापन में कहा कि निर्माण कार्यों के किए उपयोग में लाए जाने वाले उप खनिज के लिए एमएम-11 और फॉर्म-जे की अनिवार्यता कर दी गई है। इसके तहत विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी ठेकेदारों को डिफाल्टर घोषित कर पांच गुना पेनाल्टी लगाकर अर्थदंड वसूली का आदेश दिया गया है। कहा कि पूर्व में ठेकेदारों से निर्माण कार्यों के बिलों से निर्धारित रॉयल्टी काटकर ही भुगतान किया जाता रहा है। नया शासनादेश जारी होने के बाद प्रदेश भर में विकास कार्य प्रभावित हो चुके हैं और ठेकेदारों के लिए कार्य करना असंभव हो गया है।
प्रदर्शन में ठेकेदार संघ के अध्यक्ष देवेंद्र पाल सिंह, उपाध्यक्ष किशोर लखेड़ा, भरत सिंह नेगी, वीरेंद्र नेगी, दिलवर सिंह, विनोद रावत, अनुज भट्ट, राजीव कोठारी, दिनेश रावत, आशीष रावत, दीपक गुसाईं, विनयपाल सिंह नेगी और जगदीश जखमोला आदि शामिल रहे।
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शनिवार को पर्वतीय ठेकेदार संघ से जुड़े ठेकेदार लोनिवि गेस्ट हाउस में एकत्र हुए। यहां से उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नगर में जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए तहसील पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुलवीर कोठियाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ठेकेदारों ने ज्ञापन में कहा कि निर्माण कार्यों के किए उपयोग में लाए जाने वाले उप खनिज के लिए एमएम-11 और फॉर्म-जे की अनिवार्यता कर दी गई है। इसके तहत विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी ठेकेदारों को डिफाल्टर घोषित कर पांच गुना पेनाल्टी लगाकर अर्थदंड वसूली का आदेश दिया गया है। कहा कि पूर्व में ठेकेदारों से निर्माण कार्यों के बिलों से निर्धारित रॉयल्टी काटकर ही भुगतान किया जाता रहा है। नया शासनादेश जारी होने के बाद प्रदेश भर में विकास कार्य प्रभावित हो चुके हैं और ठेकेदारों के लिए कार्य करना असंभव हो गया है।
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प्रदर्शन में ठेकेदार संघ के अध्यक्ष देवेंद्र पाल सिंह, उपाध्यक्ष किशोर लखेड़ा, भरत सिंह नेगी, वीरेंद्र नेगी, दिलवर सिंह, विनोद रावत, अनुज भट्ट, राजीव कोठारी, दिनेश रावत, आशीष रावत, दीपक गुसाईं, विनयपाल सिंह नेगी और जगदीश जखमोला आदि शामिल रहे।
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