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वित्त नियंत्रण, सहायक वित्त नियंत्रण और लेखाकार पर लगाया कोर्ट की अवमानना का आरोप
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कोटद्वार। लोनिवि नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ जिला इकाई की बैठक में वर्कचार्ज से नियमित हुए कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों पर चर्चा की गई। इस दौरान वित्त नियंत्रण, सहायक वित्त नियंत्रण और लेखाकार पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना का आरोप लगाया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत नाम से न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा।
शुक्रवार देर शाम को लोनिवि गेस्ट हाउस में संघ की पौड़ी जिला इकाई की बैठक हुई। इसमें मुख्य अतिथि संघ के प्रदेश अध्यक्ष सतीश चंद्र ने वित्त नियंत्रण, सहायक वित्त नियंत्रण और लेखाकार पर समय-समय पर जारी शासनादेशों का अनुपालन न करने का आरोप लगाया। कहा कि उक्त अधिकारियों ने शासनादेशों की गलत ढंग से व्याख्या कर शासन को गुमराह किया। सतीश चंद्र ने कहा कि 18 मार्च, 2013 के शासनादेश में वर्कचार्ज की संयत सीमा को हटाया गया है और राज्य कर्मचारियों की भांति वेतनमान दिया गया है। शासनादेश संख्या 574 में वार्षिक वेतनवृद्धि ग्रेड वेतन उसी तिथि से देय होगी, जिस तिथि एवं दर से राज्य कर्मचारियों को देय है, लेकिन वित्त एवं नियंत्रण द्वारा उक्त आदेश का पालन न करते हुए वर्कचार्ज से नियमित हुए कर्मचारियों को वर्कचार्ज में पा रहे वेतन वृद्धियों का लाभ व्यैक्तिक रूप में दिया जा रहा है और वार्षिक वेतनवृद्धि के रूप में समायोजित किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 51 वर्ष पूर्व वेतनवृद्धियों के लाभ को अब काटकर वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट नैनीताल ने समान कार्य समान वेतन देने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन उक्त अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेशों का अनुपालन भी नहीं किया जा रहा है। विभाग मनमाने ढंग से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का वेतन निर्धारण कर रहा है, जिससे कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेज्युटी, नकदीकरण व वेतन में कटौती की जा रही है।
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शुक्रवार देर शाम को लोनिवि गेस्ट हाउस में संघ की पौड़ी जिला इकाई की बैठक हुई। इसमें मुख्य अतिथि संघ के प्रदेश अध्यक्ष सतीश चंद्र ने वित्त नियंत्रण, सहायक वित्त नियंत्रण और लेखाकार पर समय-समय पर जारी शासनादेशों का अनुपालन न करने का आरोप लगाया। कहा कि उक्त अधिकारियों ने शासनादेशों की गलत ढंग से व्याख्या कर शासन को गुमराह किया। सतीश चंद्र ने कहा कि 18 मार्च, 2013 के शासनादेश में वर्कचार्ज की संयत सीमा को हटाया गया है और राज्य कर्मचारियों की भांति वेतनमान दिया गया है। शासनादेश संख्या 574 में वार्षिक वेतनवृद्धि ग्रेड वेतन उसी तिथि से देय होगी, जिस तिथि एवं दर से राज्य कर्मचारियों को देय है, लेकिन वित्त एवं नियंत्रण द्वारा उक्त आदेश का पालन न करते हुए वर्कचार्ज से नियमित हुए कर्मचारियों को वर्कचार्ज में पा रहे वेतन वृद्धियों का लाभ व्यैक्तिक रूप में दिया जा रहा है और वार्षिक वेतनवृद्धि के रूप में समायोजित किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 51 वर्ष पूर्व वेतनवृद्धियों के लाभ को अब काटकर वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट नैनीताल ने समान कार्य समान वेतन देने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन उक्त अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेशों का अनुपालन भी नहीं किया जा रहा है। विभाग मनमाने ढंग से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का वेतन निर्धारण कर रहा है, जिससे कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेज्युटी, नकदीकरण व वेतन में कटौती की जा रही है।
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