{"_id":"5e135e7e8ebc3e87e577b45c","slug":"constellation-garden-became-the-base-of-anti-social-elements-kotdwar-news-drn3318813132","type":"story","status":"publish","title_hn":"नक्षत्र वाटिका में शाम ढलते ही सजती है नशेड़ियों की महफिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नक्षत्र वाटिका में शाम ढलते ही सजती है नशेड़ियों की महफिल
विज्ञापन
कोटद्वार में बदहाल पड़ी हुई नक्षत्र वाटिका।
- फोटो : KOTDWAR
हिदू धर्म में नक्षत्रों से जुड़े पौधों के बारे में जानकारी देने के लिए लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से तैयार की गई नक्षत्र वाटिका के नक्षत्र खराब हो गए हैं। कोटद्वार रेंज के अंतर्गत आधा हेक्टेयर भूमि में बनाई गई वाटिका नशेड़ियों की महफिलों का अड्डा बना हुआ है। बदहाली के चलते लोग वाटिका के अंदर घूमना तो दूर आसपास जाना पसंद नहीं कर रहे हैं।
वर्ष 2009-10 में मुख्यमंत्री हरित विकास योजना के तहत पनियाली बीट में करीब बीस लाख की लागत से नक्षत्र वाटिका का निर्माण किया गया था। प्रदेश के तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट ने निर्माण कार्य का शिलान्यास किया और अगले दो वर्षों में वाटिका ने आकार ले लिया था। वाटिका में नौ ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के हिसाब से पेड़ लगाए गए। इनकी देखरेख के लिए एक कर्मचारी की तैनाती कर दी गई। जिसके कारण सुबह-शाम क्षेत्र के लोगों के घूमने का यह बेहतर स्थान बन गया। लेकिन, कुछ साल बाद ही वाटिका को दिए जाने वाला बजट रोक दिया गया और देखरेख में लगे कर्मचारी को भी हटा लिया गया। नक्षत्र वाटिका अब पूरी तरह से असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है। शिलान्यास का पत्थर भी तोड़ दिया गया है, वाटिका झाड़ियों में तब्दील हो गई है। शाम ढलते ही हर रोज यहां शराबियों की महफिल सजने लगती है।
उधर, रेंज अधिकारी बीबी शर्मा ने बताया कि नक्षत्र वाटिका के लिए हर बार आला अधिकारियों से बजट की मांग की जाती है, लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण पार्क की देखरेख नहीं हो पा रही है। पार्क से नशेड़ियों को खदेड़ा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2009-10 में मुख्यमंत्री हरित विकास योजना के तहत पनियाली बीट में करीब बीस लाख की लागत से नक्षत्र वाटिका का निर्माण किया गया था। प्रदेश के तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट ने निर्माण कार्य का शिलान्यास किया और अगले दो वर्षों में वाटिका ने आकार ले लिया था। वाटिका में नौ ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के हिसाब से पेड़ लगाए गए। इनकी देखरेख के लिए एक कर्मचारी की तैनाती कर दी गई। जिसके कारण सुबह-शाम क्षेत्र के लोगों के घूमने का यह बेहतर स्थान बन गया। लेकिन, कुछ साल बाद ही वाटिका को दिए जाने वाला बजट रोक दिया गया और देखरेख में लगे कर्मचारी को भी हटा लिया गया। नक्षत्र वाटिका अब पूरी तरह से असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है। शिलान्यास का पत्थर भी तोड़ दिया गया है, वाटिका झाड़ियों में तब्दील हो गई है। शाम ढलते ही हर रोज यहां शराबियों की महफिल सजने लगती है।
विज्ञापन
उधर, रेंज अधिकारी बीबी शर्मा ने बताया कि नक्षत्र वाटिका के लिए हर बार आला अधिकारियों से बजट की मांग की जाती है, लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण पार्क की देखरेख नहीं हो पा रही है। पार्क से नशेड़ियों को खदेड़ा जाएगा।
विज्ञापन