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बदलती रहती है सामाजिक न्याय की परिभाषा: प्रो. कौल
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sat, 26 Nov 2016 10:28 PM IST
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संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने कहा कि सामाजिक न्याय की परिभाषा परिस्थिति और समय के अनुसार बदलती रहती है। भूमंडलीकरण के दौर में सामाजिक न्याय पर राजनैतिक समर्थन पूरे विश्व भर में हासिल हो रहा है।
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शनिवार को बिड़ला परिसर स्थित सीनेट हॉल में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से संविधान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता कुलपति प्रो. जेएल कौल ने छात्रों को भारतीय संविधान के बारे में विस्तार से बताया।
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इस दौरान उन्होंने भारतीय संविधान के तहत सामाजिक न्याय के दार्शनिक एवं सैद्धांतिक पक्ष पर छात्रों को बारीकी से समझाया। कहा कि स्वतंत्रता के बाद सामाजिक न्याय के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं। यद्यपि अभी भी अनेक चुनौतियां हैं, जिनका समाधान किया जाना जरूरी है।
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प्रो. हिमांशु बौड़ाई ने कहा कि सामाजिक न्याय आज के परिपेक्ष में प्रासंगिक हैं। कहा कि अभी गरीबी, बेरोजगारी जैसी अनेक चुनौतियां हैं। जिनका निराकरण किए बिना सामाजिक न्याय को प्राप्त किया जाना संभव नहीं है। कार्यक्रम में ओएसडी प्रो. डीएस नेगी, प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलसचिव डा. एके झा, मुख्य नियंता प्रो. एचबीएस चौहान आदि मौजूद थे।