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सांस्कृतिक संध्या में चैता की चैत्वाली..गीत पर थिरके दर्शक
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लैंसडौन में आयोजित देवभूमि उत्सव में लोक गायक अमित सागर की प्रस्तुति पर थिरकते लोग।
- फोटो : KOTDWAR
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लैंसडौन में आयोजित देवभूमि उत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में लोकगायक अमित सागर के लोकगीतों का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। लोग देर रात तक गढ़वाली लोक गीतों पर थिरकते रहे। उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे रंगकर्मियों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा।
रविवार देर शाम को आयोजत अंतिम सांस्कृतिक संध्या का वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, ब्लॉक प्रमुख दीपक भंडारी, खंड शिक्षा अधिकारी रामेश्वरी बढ़वाल, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल और मध्य क्षेत्र के प्रबंध निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने किया। मुख्य अतिथि वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने अपने संबोधन ऐसे आयोजनोें को विकास का प्रतीक बताते हुए इनके संरक्षण पर जोर देने की अपील की । कहा कि सांस्कृतिक विकास ही बौद्धिक विकास का पर्याय है। उन्होंने सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गीतांजलि को सम्मानित किया। तीसरी संध्या में उत्तर मध्य क्षेत्र के गीतांजलि शर्मा एवं ग्रुप मथुरा ने कथक के शास्त्रीय पक्ष थाट, आमद, परन चक्कर की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ भाव पक्ष के तहत सूरदास की रचना पर आधारित नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुति दी। हरियाणा के कलाकारों ने बोल रग्गड़ - रग्गड़ घोटी है.., गोरा तूने भोले की बोल पर बम लहरी.. नृत्य प्रस्तुत किया। जीतेंद्र शाह ग्रुप ने राज्य की सांस्कृति को लोकनृत्य के जरिए उकेरा। राजस्थान के कलाकारों ने घूमर नृत्य की प्रस्तुति से माहौल को गर्माए रखा। प्रयागराज के कलाकारों ने गंगा गीत बोल गंगा जी के तीरे लागत, बा कुभं के मेलबा.. पर लोकनृत्य से समा बांधा।
लोकगायक अमित सागर ने अपने प्रसिद्ध जागर चैता की ये चैत्वाली.. ,नाच मेरी बीरा.., ता छुमा, हे धना.., मेरी बाजू रंगा मुला मूल हंसली.., बेडू पाकों बारह मासा.., गीतों की शानदार प्रस्तुतियों से पूरे पंडाल में बैठे दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर तहसीलदार सोहन सिंह असवाल, मधुकांत मिश्रा, के के श्रीवास्तव, भावना वर्मा, मुकेश अग्रवाल, संजय कन्नौजिया, प्रेम थापा, हुकूम सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत थापा और व्याख्या वशिष्ठ ने किया।
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रविवार देर शाम को आयोजत अंतिम सांस्कृतिक संध्या का वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, ब्लॉक प्रमुख दीपक भंडारी, खंड शिक्षा अधिकारी रामेश्वरी बढ़वाल, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल और मध्य क्षेत्र के प्रबंध निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने किया। मुख्य अतिथि वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने अपने संबोधन ऐसे आयोजनोें को विकास का प्रतीक बताते हुए इनके संरक्षण पर जोर देने की अपील की । कहा कि सांस्कृतिक विकास ही बौद्धिक विकास का पर्याय है। उन्होंने सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गीतांजलि को सम्मानित किया। तीसरी संध्या में उत्तर मध्य क्षेत्र के गीतांजलि शर्मा एवं ग्रुप मथुरा ने कथक के शास्त्रीय पक्ष थाट, आमद, परन चक्कर की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ भाव पक्ष के तहत सूरदास की रचना पर आधारित नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुति दी। हरियाणा के कलाकारों ने बोल रग्गड़ - रग्गड़ घोटी है.., गोरा तूने भोले की बोल पर बम लहरी.. नृत्य प्रस्तुत किया। जीतेंद्र शाह ग्रुप ने राज्य की सांस्कृति को लोकनृत्य के जरिए उकेरा। राजस्थान के कलाकारों ने घूमर नृत्य की प्रस्तुति से माहौल को गर्माए रखा। प्रयागराज के कलाकारों ने गंगा गीत बोल गंगा जी के तीरे लागत, बा कुभं के मेलबा.. पर लोकनृत्य से समा बांधा।
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लोकगायक अमित सागर ने अपने प्रसिद्ध जागर चैता की ये चैत्वाली.. ,नाच मेरी बीरा.., ता छुमा, हे धना.., मेरी बाजू रंगा मुला मूल हंसली.., बेडू पाकों बारह मासा.., गीतों की शानदार प्रस्तुतियों से पूरे पंडाल में बैठे दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर तहसीलदार सोहन सिंह असवाल, मधुकांत मिश्रा, के के श्रीवास्तव, भावना वर्मा, मुकेश अग्रवाल, संजय कन्नौजिया, प्रेम थापा, हुकूम सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत थापा और व्याख्या वशिष्ठ ने किया।
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