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Kotdwar News: भातखाल-बांसी-गोरखनाथ मंदिर मार्ग दो दशक बाद भी अधूरा

Thu, 08 Oct 2026 05:02 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Thu, 08 Oct 2026 05:02 PM IST
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Bhatkhal-Bansi-Gorakhnath Temple road remains incomplete even after two decades.
ग्रामीण बारिश में कीचड़ और गर्मियों में धूल से परेशान
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दुगड्डा (कोटद्वार)। जयहरीखाल ब्लॉक के अंतर्गत बांसी, बोरगांव, गजवाड़ और घिल्डियाल गांवों के ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो दशक पहले भातखाल से धूमखाल तक मार्ग का निर्माण कराया था लेकिन बांसी के निकट पहले किमी का भू-भाग हस्तांतरित नहीं होने से सड़क आज भी कच्ची है। इससे ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ रही है।

जयहरीखाल ब्लॉक के अंतर्गत गुरु गोरखनाथ मंदिर के समीप ग्रामीणों की सुविधा के लिए वर्ष 2005-06 में 68 लाख की लागत से भातखाल से धूमखाल तक तीन किमी मोटर मार्ग बनाया गया था। तत्कालीन लैंसडौन विधायक डॉ. हरक सिंह रावत के प्रयासों से सड़क का निर्माण हुआ था। हालांकि भातखाल से बांसी तक पहला किमी अब भी कच्चा है। गर्मियों में धूल और बरसात में गड्ढों व कीचड़ के बीच वाहनों की आवाजाही होती है। पैदल चलने वाले ग्रामीणों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
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ग्रामीणों के अनुसार भातखाल से बांसी तक 1980 के दशक में वन विभाग ने कच्ची सड़क बनाई थी। बांसी के पास वन क्षेत्र में चूना पत्थर का खनन होता था और इसे ट्रकों से कोटद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचाया जाता था। वन अधिनियम लागू होने के बाद आरक्षित वन क्षेत्र में खनन और पेड़ों के कटान पर रोक लग गई। इसके बाद मार्ग का उपयोग ग्रामीण करते रहे। पूर्व बीडीसी सदस्य सूरजपाल सिंह, बृजमोहन सिंह, भारत सिंह आदि ने मार्ग के पहले किमी. का डामरीकरण जल्द कराने की मांग की है।
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भातखाल-बांसी-गोरखनाथ मंदिर मोटर मार्ग का पहला किमी आरक्षित वन क्षेत्र में आता है। वन भूमि हस्तांतरण होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
- कपिल कुमार, एई लोनिवि दुगड्डा।
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मार्ग का पहला किमी कच्चा मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र में है। वन भूमि हस्तांतरण के बाद ही इसका पक्कीकरण हो सकेगा। कार्ययोजना में जांच की जाएगी कि मार्ग वन मार्ग या अश्व मार्ग के रूप में दर्ज है। वन विभाग को बजट मिलने पर इसकी मरम्मत कराई जा सकती है।
- रजत कपिल, उप प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।
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