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मुस्कान ज्योति कूड़ा समिति के अध्यक्ष की जमानत मंजूर
ब्यूरो/ अमर उजाला कोटद्वार
Updated Tue, 16 Feb 2016 08:33 PM IST
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जिला न्यायाधीश कंवर सेन की अदालत ने मुस्कान ज्योति कूड़ा निस्तारण संस्था के अध्यक्ष मेवा लाल की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। जिला न्यायालय ने तीस-तीस हजार रुपये के दो जमानती और निजी मुचलके पर मेवा लाल को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
बचाव पक्ष की ओर से उनके वकील बृज मोहन सिंह चौहान ने सोमवार को जिला जज कैंप कोटद्वार में मेवा लाल की जमानत याचिका प्रस्तुत की। जमानत के प्रश्न पर जिला अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनते हुए तीस-तीस हजार रुपये के दो जमानती पेश करने पर उनकी जमानत स्वीकार कर ली। बचाव पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि पूर्व पालिकाध्यक्ष को इस मामले में जमानत दे दी गई है । यदि उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो उसके कहीं भागने का कोई अंदेशा नहीं है। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील अवनीश नेगी ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए जमानत का विरोध किया। जिला जज ने बचाव पक्ष की दलील और तर्कों से सहमत होते हुए जमानत याचिका मंजूर कर ली।
क्या था मुस्कान ज्योति योजना घोटाला
इस योजना के तहत वर्ष 2011 में एक साल के लिए उत्तर प्रदेश की मुस्कान ज्योति संस्था के साथ नगर पालिका ने अनुबंध किया था। जिसमें उसे घर-घर से कूड़ा उठाने के बाद उसका प्रबंधन कर उससे खाद बनाना था। इसके लिए पालिका द्वारा संस्था को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। जांच में टेंडर प्रक्रिया अपनाए बिना संस्था को 24.79 लाख रुपये का भुगतान भी करना पाया गया था। जिसमें संस्था आधे में ही काम छोड़कर चलती बनी। मुकदमा जांच अधिकारी तत्कालीन एसडीएम पूरण सिंह राणा की ओर से दर्ज कराया गया था।
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बचाव पक्ष की ओर से उनके वकील बृज मोहन सिंह चौहान ने सोमवार को जिला जज कैंप कोटद्वार में मेवा लाल की जमानत याचिका प्रस्तुत की। जमानत के प्रश्न पर जिला अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनते हुए तीस-तीस हजार रुपये के दो जमानती पेश करने पर उनकी जमानत स्वीकार कर ली। बचाव पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि पूर्व पालिकाध्यक्ष को इस मामले में जमानत दे दी गई है । यदि उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो उसके कहीं भागने का कोई अंदेशा नहीं है। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील अवनीश नेगी ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए जमानत का विरोध किया। जिला जज ने बचाव पक्ष की दलील और तर्कों से सहमत होते हुए जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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क्या था मुस्कान ज्योति योजना घोटाला
इस योजना के तहत वर्ष 2011 में एक साल के लिए उत्तर प्रदेश की मुस्कान ज्योति संस्था के साथ नगर पालिका ने अनुबंध किया था। जिसमें उसे घर-घर से कूड़ा उठाने के बाद उसका प्रबंधन कर उससे खाद बनाना था। इसके लिए पालिका द्वारा संस्था को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। जांच में टेंडर प्रक्रिया अपनाए बिना संस्था को 24.79 लाख रुपये का भुगतान भी करना पाया गया था। जिसमें संस्था आधे में ही काम छोड़कर चलती बनी। मुकदमा जांच अधिकारी तत्कालीन एसडीएम पूरण सिंह राणा की ओर से दर्ज कराया गया था।
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