फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   Badrinath widening of Highway 700 crore sanctioned

बदरीनाथ हाईवे के चौड़ीकरण को 700 करोड़ मंजूर

Sun, 23 Oct 2016 10:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर Updated Sun, 23 Oct 2016 10:19 PM IST
विज्ञापन

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के मुनिकीरेती से स्वीत तक 103 किलोमीटर पैच का डबललेन कार्य ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड में होगा। उत्तराखंड में ईपीसी मोड में कार्य कराने का यह पहला प्रयोग होगा।  केंद्र ने इस योजना के लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

विज्ञापन


बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का मुनिकीरेती से सिरोहबगड़ तक का पैच लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग श्रीनगर खंड के अधीन आता है। दो साल पहले तक यह पैच सीमा सड़क संगठन के अधीन था। लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग श्रीनगर खंड ने डेढ़ साल पहले मुनिकीरेती से स्वीत तक (किलोमीटर 235-338) के डबललेन में चौड़ीकरण की डीपीआर भेजी थी।
विज्ञापन


लोनिवि को स्वयं यह कार्य करना था, लेकिन भूतल परिहवन एवं राजमार्ग मंत्रालय के स्तर पर यह तय हुआ कि यह कार्य ईपीसी मोड में कराया जाए, ताकि देश-विदेश की बड़ी एजेंसियां तय समय पर स्वीकृत लागत में काम कर सके। केंद्र ने 103 किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए 700 करोड़ की स्वीकृति देते हुए निविदा आमंत्रित कर दी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र ने तीन चरणों में (मुनिकीरेती-कौड़ियाला, कौड़ियाला-देवप्रयाग, देवप्रयाग-स्वीत) में डबललेन कार्य मंजूर किया है। निविदा में जो भी कंपनी फाइनल होंगी, वह कागजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद कार्य शुरू कर देंगी। चार साल तक अनुरक्षण का जिम्मा संबंधित एजेंसी का रहेगा।

क्या है ईपीसी मोड
ईपीसी तीन शब्दों इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी), प्रोक्योरमेंट(खरीद) और कंस्ट्रक्शन (निर्माण) से मिलकर बना है। यह कार्य कराने का ऐसा तरीका है, जिसमें सरकार और प्राइवेट सेक्टर सार्वजनिक संपत्ति के निर्माण के लिए अनुबंध करते हैं।

निर्माण कार्य का डिजायन, तकनीकी, सामग्री खरीद, निर्माण और अन्य सारे कार्य प्राइवेट सेक्टर को करने होते हैं। सरकार को सिर्फ यह बताना होता है कि अमुक धनराशि में अमुक कार्य करना होगा। इसके अलावा थर्ड पार्टी के रुप में अधिकृत इंजीनियर कार्य की निगरानी करते हैं।

यह है फायदा
ईपीसी मोड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि लागत स्वीकृत बजट से अधिक पहुंच जाती है तो अतिरिक्त लागत का भार प्राइवेट एजेंसी वहन करती है। इसका बोझ सरकार के ऊपर नहीं पड़ता है। साथ ही लागत न बढ़ जाए, इसलिए एजेंसी के ऊपर तय सीमा पर काम करने का दबाव होता है।


यदि काम देरी से हुआ, तो एजेंसी पर पेनाल्टी भी पड़ती है। इस मोड में सरकारी एजेंसी की भूमिका सीमित हो जाती है। इसमें पूर्ण रुप से कानूनी जिम्मेदारी प्राइवेट एजेंसी की होती है। साथ ही ईपीसी मोड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदा आमंत्रित करने से विदेश की बेहतरीन एजेंसियों के साथ काम करने का मौका मिलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed