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साक्ष्य के अभाव में पति समेत चारों आरोपी दोषमुक्त
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कोटद्वार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिभा तिवारी की अदालत ने वर्ष 2017 के ज्योति दहेज हत्याकांड के मामले में पति समेत चारों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले में दहेज उत्पीड़न और मांग के तथ्यों को साबित करने में पूरी तरह से असफल रहा है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद वर्मा और प्रवेश रावत ने बताया कि ग्राम उनियाल मोरज पौड़ी गढ़वाल निवासी गजेंद्र सिंह ने गत 16 अप्रैल 2017 को कोतवाली पुलिस को इस मामले में तहरीर दी थी। तहरीर में कहा गया था कि उसकी पुत्री ज्योति का विवाह 14 नवंबर 2016 को मीट मार्केट आमपड़ाव कोटद्वार निवासी दीपक रावत पुत्र उमेश्वर प्रसाद के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही उसकी बेटी को ससुर, सास, पति, देवर दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। आरोपियों ने उनसे पांच लाख रुपये दहेज की डिमांड की थी। इस धनराशि से वह दीपक के लिए दुकान खोलने की बात कर रहे थे। कई बार ज्योति ने इसकी जानकारी उन्हें फोन पर दी, लेकिन उन्होंने उसे समझाकर शांत करा दिया था। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर परिवार के सदस्यों ने ज्योति को 16 अप्रैल, 2017 को मारकर टांग दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 11 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने फैसले में कहा कि मृतका ज्योति की डायरी में कहीं भी दहेज के लिए मारपीट या उत्पीड़न की बात नहीं लिखी पाई गई। अदालत ने दहेज हत्या के इस मामले में साक्ष्यों के अभाव में मृतका के पति दीपक रावत, ससुर उमेश्वर सिंह, सास मुन्नी देवी उर्फ शशि देवी, देवर संदीप रावत को अंतर्गत धारा 304 (ख) सपठित धारा 34 आईपीसी एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त करार दिया।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद वर्मा और प्रवेश रावत ने बताया कि ग्राम उनियाल मोरज पौड़ी गढ़वाल निवासी गजेंद्र सिंह ने गत 16 अप्रैल 2017 को कोतवाली पुलिस को इस मामले में तहरीर दी थी। तहरीर में कहा गया था कि उसकी पुत्री ज्योति का विवाह 14 नवंबर 2016 को मीट मार्केट आमपड़ाव कोटद्वार निवासी दीपक रावत पुत्र उमेश्वर प्रसाद के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही उसकी बेटी को ससुर, सास, पति, देवर दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। आरोपियों ने उनसे पांच लाख रुपये दहेज की डिमांड की थी। इस धनराशि से वह दीपक के लिए दुकान खोलने की बात कर रहे थे। कई बार ज्योति ने इसकी जानकारी उन्हें फोन पर दी, लेकिन उन्होंने उसे समझाकर शांत करा दिया था। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर परिवार के सदस्यों ने ज्योति को 16 अप्रैल, 2017 को मारकर टांग दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 11 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने फैसले में कहा कि मृतका ज्योति की डायरी में कहीं भी दहेज के लिए मारपीट या उत्पीड़न की बात नहीं लिखी पाई गई। अदालत ने दहेज हत्या के इस मामले में साक्ष्यों के अभाव में मृतका के पति दीपक रावत, ससुर उमेश्वर सिंह, सास मुन्नी देवी उर्फ शशि देवी, देवर संदीप रावत को अंतर्गत धारा 304 (ख) सपठित धारा 34 आईपीसी एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त करार दिया।
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