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कोटद्वार में बनेगी बांस मंडी, बांस ज्वैलरी की लगेगी फैक्ट्री
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कोटद्वार। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के कोटद्वार स्थित बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। वन अधिनियम में संशोधन कर सरकार ने जहां बांस को पेड़ की श्रेणी से बांस की खेती और खरीद-फरोख्त का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, वहीं नेशनल बैंबो मिशन के तहत कोटद्वार केंद्र को 14 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इससे कोटद्वार में बांस की मंडी और बांस ज्वैलरी की फैक्ट्री स्थापित करने का प्रस्ताव है। वन अधिनियम 1927 में संशोधन के बाद राज्य सरकार ने भी बांस उत्पादन को उद्योग का दर्जा दे दिया है। इससे निजी भूमि व सामुदायिक भूमि में बांस की खेती का रास्ता खुल गया है।
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से वर्ष 2005 में बांस के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से कोटद्वार में इस केंद्र की स्थापना की गई थी। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए खासी दिलचस्पी दिखाई और प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता न होने के कारण लोगों का बांस के उत्पाद बनाने के काम से धीरे-धीरे मोह भंग होने लगा।
बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने नेशनल बैंबो मिशन के तहत कोटद्वार केंद्र के लिए 14 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है, जिससे कोटद्वार में बांस की मंडी और बांस ज्वैलरी की फैक्ट्री स्थापित करने का प्रस्ताव है। केंद्र के माध्यम से सभी माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को ट्रेनिंग देने के साथ ही श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में 100 लोगों का प्रशिक्षण शुरू होने जा रहा है।
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बांस को उद्योग का दर्जा मिलने से अब सामुदायिक और निजी भूमि में बांस की नर्सरी और उत्पादन हो सकेगा। इससे बांस उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा। आगामी मानसून सत्र में कोटद्वार, देहरादून, उधमसिंहनगर में बांस का उत्पादन शुरू होगा। इसके लिए काश्तकारों की ओर से परिषद को कई आवेदन प्राप्त हुए हैं।
-दिनेश जोशी, प्रोग्राम मैनेजर, उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून
-फोटो
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उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से वर्ष 2005 में बांस के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से कोटद्वार में इस केंद्र की स्थापना की गई थी। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए खासी दिलचस्पी दिखाई और प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता न होने के कारण लोगों का बांस के उत्पाद बनाने के काम से धीरे-धीरे मोह भंग होने लगा।
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बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने नेशनल बैंबो मिशन के तहत कोटद्वार केंद्र के लिए 14 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है, जिससे कोटद्वार में बांस की मंडी और बांस ज्वैलरी की फैक्ट्री स्थापित करने का प्रस्ताव है। केंद्र के माध्यम से सभी माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को ट्रेनिंग देने के साथ ही श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में 100 लोगों का प्रशिक्षण शुरू होने जा रहा है।
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बांस को उद्योग का दर्जा मिलने से अब सामुदायिक और निजी भूमि में बांस की नर्सरी और उत्पादन हो सकेगा। इससे बांस उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा। आगामी मानसून सत्र में कोटद्वार, देहरादून, उधमसिंहनगर में बांस का उत्पादन शुरू होगा। इसके लिए काश्तकारों की ओर से परिषद को कई आवेदन प्राप्त हुए हैं।
-दिनेश जोशी, प्रोग्राम मैनेजर, उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून
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