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राहत कैंप में रह रहे परिवारों ने की उनके आवास वापस सौंपने की मांग
Updated Wed, 19 Sep 2018 10:08 PM IST
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कोटद्वार। प्राथमिक विद्यालय नंबर 2 में बनाए राहत कैंप में रह रहे आमपड़ाव के छह परिवारों ने नगर निगम और तहसील प्रशासन से उन्हें उनके आवास सौंपने की मांग की है। कहा कि उनके आमपड़ाव स्थित आवासों को प्रशासन ने बरसात में आपदा और सुरक्षा कारणों से सील कर दिया था।
बुधवार को बाढ़ प्रभावित रानी देवी, गुड्डी देवी, फूलवती देवी, कन्हैया कुमार, ध्यान सिंह, शारदा देवी ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उनके आवास उन्हें सौंपने की मांग की। कहा कि बरसात खत्म हो चुकी है और अब सभी परिवार अपने घरों में रहने के इच्छुक हैं। कहा कि उनके बच्चे पढ़ाई करते हैं। बच्चों की परीक्षाएं सिर पर हैं। राहत कैंप में रहने से उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रभावितों ने प्रशासन से उन्हें उनके आवास वापस सौंपने की मांग की है।
बाढ़ प्रभावितों ने कहा कि गत 25 अगस्त को आई आपदा के बाद बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम प्रशासन ने 27 अगस्त को आमपड़ाव में पनियाली गदेरे के किनारे बने छह परिवारों के मकानों को सील कर उन्हें प्राथमिक विद्यालय नं. 1 में बनाए राहत कैंप में शिफ्ट कर दिया था। तब से प्रभावित परिवार इसी राहत शिविर में रह रहे हैं। एसडीएम कमलेश मेहता का कहना है कि संबंधित लोग नगर निगम में अपने पट्टे दिखाकर घरों में जा सकते हैं।
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बुधवार को बाढ़ प्रभावित रानी देवी, गुड्डी देवी, फूलवती देवी, कन्हैया कुमार, ध्यान सिंह, शारदा देवी ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उनके आवास उन्हें सौंपने की मांग की। कहा कि बरसात खत्म हो चुकी है और अब सभी परिवार अपने घरों में रहने के इच्छुक हैं। कहा कि उनके बच्चे पढ़ाई करते हैं। बच्चों की परीक्षाएं सिर पर हैं। राहत कैंप में रहने से उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रभावितों ने प्रशासन से उन्हें उनके आवास वापस सौंपने की मांग की है।
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बाढ़ प्रभावितों ने कहा कि गत 25 अगस्त को आई आपदा के बाद बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम प्रशासन ने 27 अगस्त को आमपड़ाव में पनियाली गदेरे के किनारे बने छह परिवारों के मकानों को सील कर उन्हें प्राथमिक विद्यालय नं. 1 में बनाए राहत कैंप में शिफ्ट कर दिया था। तब से प्रभावित परिवार इसी राहत शिविर में रह रहे हैं। एसडीएम कमलेश मेहता का कहना है कि संबंधित लोग नगर निगम में अपने पट्टे दिखाकर घरों में जा सकते हैं।
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