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वन निगम से छंटनी कर निकाले कर्मियों को मिलेगा भता
Updated Fri, 02 Feb 2018 10:37 PM IST
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कोटद्वार। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में वन निगम से छंटनी कर निकाले गए हजारों कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की भांति समस्त भत्ता जारी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से उत्तराखंड में करीब तीन सौ कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। उत्तराखंड वन विकास निगम कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष भूपाल सिंह रावत एवं महामंत्री देवी प्रसाद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की प्रति उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एवं वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक को भेजकर कर्मचारियों को तत्काल बकाया भुगतान कराने की मांग की है।
ट्रस्ट अध्यक्ष भूपाल सिंह रावत ने कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में वन निगम में कार्यरत दैनिक स्केलर एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने नियमित कर्मियों की भांति भत्तों की मांग उठाई थी। निगम प्रबंधन स्तर पर दैनिक कर्मचारियों की मांग की अनदेखी होने पर वन निगम कल्याण संघ उत्तरप्रदेश ने इलाहाबाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर 1991 को कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय ने दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को भी नियमित कर्मचारियों की भांति भत्ता जारी करने का आदेश दिया। उत्तर प्रदेश वन निगम ने आदेश को लागू नहीं किया। न्यायालय ने 12 जुलाई 1994 को दोबारा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया। वन निगम ने फैसला लागू करने के बजाय कर्मचारियों की छंटनी कर हजारों दैनिक कर्मचारियों को निकाल दिया। वन निगम कर्मचारी कल्याण संघ ने निकाले गए कर्मचारियों की लड़ाई पुरजोर ढंग से लड़ी। उत्तराखंड वन विकास निगम कल्याण ट्रस्ट अध्यक्ष रावत ने कहा कि 24 साल की लड़ाई के बाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने तीन नवंबर 2017 को छंटनी कर निकाले गए सभी दैनिक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की भांति भत्ते जारी करने का आदेश दिया है। इस आदेश से करीब दो हजार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इनमें करीब तीन सौ कर्मचारी उत्तराखंड के हैं। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वन निगम के प्रबंध निदेशक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक गढ़वाल को कोर्ट के फैसले की प्रति भेजकर बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग की है।
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ट्रस्ट अध्यक्ष भूपाल सिंह रावत ने कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में वन निगम में कार्यरत दैनिक स्केलर एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने नियमित कर्मियों की भांति भत्तों की मांग उठाई थी। निगम प्रबंधन स्तर पर दैनिक कर्मचारियों की मांग की अनदेखी होने पर वन निगम कल्याण संघ उत्तरप्रदेश ने इलाहाबाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर 1991 को कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय ने दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को भी नियमित कर्मचारियों की भांति भत्ता जारी करने का आदेश दिया। उत्तर प्रदेश वन निगम ने आदेश को लागू नहीं किया। न्यायालय ने 12 जुलाई 1994 को दोबारा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया। वन निगम ने फैसला लागू करने के बजाय कर्मचारियों की छंटनी कर हजारों दैनिक कर्मचारियों को निकाल दिया। वन निगम कर्मचारी कल्याण संघ ने निकाले गए कर्मचारियों की लड़ाई पुरजोर ढंग से लड़ी। उत्तराखंड वन विकास निगम कल्याण ट्रस्ट अध्यक्ष रावत ने कहा कि 24 साल की लड़ाई के बाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने तीन नवंबर 2017 को छंटनी कर निकाले गए सभी दैनिक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की भांति भत्ते जारी करने का आदेश दिया है। इस आदेश से करीब दो हजार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इनमें करीब तीन सौ कर्मचारी उत्तराखंड के हैं। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वन निगम के प्रबंध निदेशक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक गढ़वाल को कोर्ट के फैसले की प्रति भेजकर बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग की है।
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