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सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से भड़के ग्रामीण
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। धान की फसल के लिए नहरों में पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान लालपानी के ग्रामीण सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर भड़के हुए हैं। मंगलवार को काश्तकारों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने सिंचाई विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, कण्वघाटी के कलालघाटी से लेकर सिगड्डी और झंडीचौड़ तक के काश्तकारों ने सिंचाई विभाग से दाहिनी मालन नदी में धान की फसल के लिए ज्यादा पानी छोड़ने की मांगकी है।
खोह और मालन नदियों से निकलने वाली नहरों में धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान काश्तकारों ने शासन और प्रशासन को आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग की लचर कार्यशैली के चलते नहरों में सिंचाई का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। पूरे भाबर में सिंचाई के लिए ग्रामीण नलकूपों पर निर्भर होकर रह गए हैं। मंगलवार को सिंचाई विभाग की कार्यशैैली से भड़के लालपानी के ग्रामीण तहसील पहुंचे। उन्होंने एसडीएम कमलेश मेहता से मुलाकात कर सिंचाई विभाग पर कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। एसडीएम को दिए ज्ञापन में लोगों ने कहा कि वर्तमान में लालपानी क्षेत्र में 95 प्रतिशत किसान खेती करते हैं। सनेह क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। बांई खोह नहर में किसानों की मांग के अनुरूप पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जबकि दांई खोह नहर में खेती किसानी का कार्य मात्र पांच प्रतिशत रह गया है, जिससे अधिक पानी छोड़े जाने से पानी की बर्बादी हो रही है। उन्होंने उपजिलाधिकारी से लालपानी सनेह के लिए रोस्टर प्रणाली के समय में बढ़ोतरी करते हुए बांई खोह नहर में ज्यादा पानी की सप्लाई किए जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की है।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र जजेड़ी, चंद्रेश लखेड़ा, भवानी सिंह, किशोरी लाल, वीरेंद्र सिंह अधिकारी, कुलदीप, आनंद सिंह रावत, धीरेंद्र सिंह नेगी व ताजबर सिंह नेगी आदि मौजूद थे।
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खोह और मालन नदियों से निकलने वाली नहरों में धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान काश्तकारों ने शासन और प्रशासन को आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग की लचर कार्यशैली के चलते नहरों में सिंचाई का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। पूरे भाबर में सिंचाई के लिए ग्रामीण नलकूपों पर निर्भर होकर रह गए हैं। मंगलवार को सिंचाई विभाग की कार्यशैैली से भड़के लालपानी के ग्रामीण तहसील पहुंचे। उन्होंने एसडीएम कमलेश मेहता से मुलाकात कर सिंचाई विभाग पर कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। एसडीएम को दिए ज्ञापन में लोगों ने कहा कि वर्तमान में लालपानी क्षेत्र में 95 प्रतिशत किसान खेती करते हैं। सनेह क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। बांई खोह नहर में किसानों की मांग के अनुरूप पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जबकि दांई खोह नहर में खेती किसानी का कार्य मात्र पांच प्रतिशत रह गया है, जिससे अधिक पानी छोड़े जाने से पानी की बर्बादी हो रही है। उन्होंने उपजिलाधिकारी से लालपानी सनेह के लिए रोस्टर प्रणाली के समय में बढ़ोतरी करते हुए बांई खोह नहर में ज्यादा पानी की सप्लाई किए जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की है।
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इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र जजेड़ी, चंद्रेश लखेड़ा, भवानी सिंह, किशोरी लाल, वीरेंद्र सिंह अधिकारी, कुलदीप, आनंद सिंह रावत, धीरेंद्र सिंह नेगी व ताजबर सिंह नेगी आदि मौजूद थे।
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