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भूमि कब्जाने के विरोध में परिवार समेत धरने पर बैठा वयोवृद्ध पूर्व सैनिक..
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कोटद्वार। सनेह पट्टी के वार्ड नंबर-2 कुंभीचौड़ में भूमि कारोबारियों से परेशान पूर्व सैनिक ने अपने परिवार समेत तहसील मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया है। पीड़ित परिवार ने उन्हें भूमि कारोबारियों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मुहैया कराने और न्याय दिलाने की पुलिस और प्रशासन से गुहार लगाई है। कहा कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ भूमि कारोबारी उनकी पुश्तैनी जमीन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। वह घर के दिव्यांग, महिलाओं और बुजुर्गों से भी मारपीट कर चुके हैं।
मंगलवार को नौवीं गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिक वयोवृद्ध चंदन सिंह परिवार समेत कोटद्वार तहसील पहुंचे। यहां उन्होंने धरना दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता पंचम सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। वर्ष 1964 में उन्होंने कुंभीचौड़ निवासी जॉन कुमार मैसी, सुरेंद्र मैसी, दिलीप मैसी और राजेश मैसी से उक्त जमीन खरीदी थी। तब से उनका परिवार यहां रहकर खेतीबाड़ी कर रहा है। तीनों ने इस जमीन को उन्हें बेचने की बात को स्वीकार की है, जबकि जॉन कुमार मैसी के पुत्र उमेश मैसी ने इस खरीद पर एतराज जताया है, जिसमें दोनों पक्षों का सक्षम न्यायालय में वाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ भूमि कारोबारियों ने दाखिल खारिज की प्रक्रिया में अन्य विरासतियों के नाम तहसील के तत्कालीन कर्मियों की मिलीभगत से हटवा दिए। मामले में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने छह मार्च 2009 में जमीन पर अस्थायी निषेधाज्ञा लागू कर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं, लेकिन बावजूद प्रापर्टी डीलरों ने विभाग को गुमराह करते हुए उनकी भूमि पर खड़े हरे पेड़ों को कटवा दिया है। प्रापर्टी डीलर भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करने में जुटे हैं और विरोध करने पर मारपीट की जा रही है।
धरने में बैठने वालों में पूर्व सैनिक चंदन सिंह, बलवंत सिंह, सुमन देवी, निर्मला देवी, देवेश्वरी देवी, निविता देवी, अनूप सिंह, आशीष किमोठी, मुजीब नैथानी, आलोक रावत और उम्मेद सिंह रावत शामिल रहे।
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मंगलवार को नौवीं गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिक वयोवृद्ध चंदन सिंह परिवार समेत कोटद्वार तहसील पहुंचे। यहां उन्होंने धरना दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता पंचम सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। वर्ष 1964 में उन्होंने कुंभीचौड़ निवासी जॉन कुमार मैसी, सुरेंद्र मैसी, दिलीप मैसी और राजेश मैसी से उक्त जमीन खरीदी थी। तब से उनका परिवार यहां रहकर खेतीबाड़ी कर रहा है। तीनों ने इस जमीन को उन्हें बेचने की बात को स्वीकार की है, जबकि जॉन कुमार मैसी के पुत्र उमेश मैसी ने इस खरीद पर एतराज जताया है, जिसमें दोनों पक्षों का सक्षम न्यायालय में वाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ भूमि कारोबारियों ने दाखिल खारिज की प्रक्रिया में अन्य विरासतियों के नाम तहसील के तत्कालीन कर्मियों की मिलीभगत से हटवा दिए। मामले में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने छह मार्च 2009 में जमीन पर अस्थायी निषेधाज्ञा लागू कर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं, लेकिन बावजूद प्रापर्टी डीलरों ने विभाग को गुमराह करते हुए उनकी भूमि पर खड़े हरे पेड़ों को कटवा दिया है। प्रापर्टी डीलर भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करने में जुटे हैं और विरोध करने पर मारपीट की जा रही है।
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धरने में बैठने वालों में पूर्व सैनिक चंदन सिंह, बलवंत सिंह, सुमन देवी, निर्मला देवी, देवेश्वरी देवी, निविता देवी, अनूप सिंह, आशीष किमोठी, मुजीब नैथानी, आलोक रावत और उम्मेद सिंह रावत शामिल रहे।
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