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11drnkdr02140419787.sty
Updated Sat, 11 Aug 2018 10:44 PM IST
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कोटद्वार। सरकार ने नगर निगम तो बना दिया, लेकिन निगम बनने के आठ माह भी निगम का ढांचा पालिका की तर्ज पर ही चल रहा है। स्थिति यह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते जहां कर वसूली के कार्य नहीं हो पा रहे हैं, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था भी चरमराने लगी है।
प्रदेश सरकार ने गत वर्ष आठ दिसंबर को कोटद्वार भाबर के 35 ग्राम सभाओं के 73 गांवों को सम्मिलित कर कोटद्वार नगर निगम के गठन की घोषणा की। नगर निगम के अस्तित्व में आने के बाद मार्च में निगम में सम्मिलित ग्रामसभाओं में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन के ऊपर आ गई, लेकिन नगर निगम बनने के बाद भी अब भी पालिका के ढांचे पर ही काम हो रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते कर वसूली में दिक्कतें आ रही हैं। प्रशासनिक व्यवस्था न होने से भी कार्यों में विलंब हो रहा है।
नगर निगम ढांचे के अनुसार नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त के पद सृजित हुए हैं, लेकिन वर्तमान में पूरी व्यवस्था सहायक नगर आयुक्त ही संभाले हुए हैं। नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी, जोनल सेनेट्री इंस्पेक्टर होने चाहिए, लेकिन इनमें एक भी पद नहीं भरा गया है। सफाई अनुभाग में सफाई निरीक्षक के चार पद, सफाई सुपरवाइजर के 40 पद और सफाई कर्मचारियों की संख्या 300 होनी चाहिए, लेकिन यहां पूरी सफाई व्यवस्था एक सफाई निरीक्षक के भरोसे चल रही है, वहीं सफाई कर्मचारियों की संख्या महज 56 ही है। यांत्रिक अनुभाग में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, जेई सिविल तीन और जेई विद्युत यांत्रिक का एक पद होना चाहिए, लेकिन महज एक जेई के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है।
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लेखा अनुभाग में लेखाधिकारी, सहायक लेखाधिकारी, लेखाकार सहित लेखा लिपिक के चार पद सृजित होने चाहिए, लेकिन इस अनुभाग में भी अधिकारियों का टोटा बना है। प्रशासनिक अनुभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, कार्यालय अधीक्षक के साथ ही प्रथम श्रेेणी लिपिक के दस, द्वितीय श्रेणी लिपिक के 20, स्टेनोग्राफर के तीन पद सृजित हैं, लेकिन इस अनुभाग में भी कर्मचारियों का भारी टोटा है। सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी ने कहा कि शासन को पत्र भेजकर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई है।
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प्रदेश सरकार ने गत वर्ष आठ दिसंबर को कोटद्वार भाबर के 35 ग्राम सभाओं के 73 गांवों को सम्मिलित कर कोटद्वार नगर निगम के गठन की घोषणा की। नगर निगम के अस्तित्व में आने के बाद मार्च में निगम में सम्मिलित ग्रामसभाओं में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन के ऊपर आ गई, लेकिन नगर निगम बनने के बाद भी अब भी पालिका के ढांचे पर ही काम हो रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते कर वसूली में दिक्कतें आ रही हैं। प्रशासनिक व्यवस्था न होने से भी कार्यों में विलंब हो रहा है।
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नगर निगम ढांचे के अनुसार नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त के पद सृजित हुए हैं, लेकिन वर्तमान में पूरी व्यवस्था सहायक नगर आयुक्त ही संभाले हुए हैं। नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी, जोनल सेनेट्री इंस्पेक्टर होने चाहिए, लेकिन इनमें एक भी पद नहीं भरा गया है। सफाई अनुभाग में सफाई निरीक्षक के चार पद, सफाई सुपरवाइजर के 40 पद और सफाई कर्मचारियों की संख्या 300 होनी चाहिए, लेकिन यहां पूरी सफाई व्यवस्था एक सफाई निरीक्षक के भरोसे चल रही है, वहीं सफाई कर्मचारियों की संख्या महज 56 ही है। यांत्रिक अनुभाग में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, जेई सिविल तीन और जेई विद्युत यांत्रिक का एक पद होना चाहिए, लेकिन महज एक जेई के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है।
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लेखा अनुभाग में लेखाधिकारी, सहायक लेखाधिकारी, लेखाकार सहित लेखा लिपिक के चार पद सृजित होने चाहिए, लेकिन इस अनुभाग में भी अधिकारियों का टोटा बना है। प्रशासनिक अनुभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, कार्यालय अधीक्षक के साथ ही प्रथम श्रेेणी लिपिक के दस, द्वितीय श्रेणी लिपिक के 20, स्टेनोग्राफर के तीन पद सृजित हैं, लेकिन इस अनुभाग में भी कर्मचारियों का भारी टोटा है। सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी ने कहा कि शासन को पत्र भेजकर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई है।