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वन कर्मियों ने सीखे जंगल में जिंदा रहने के गुर
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:33 PM IST
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कोटद्वार। कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को एनकाउंटर में ढेर करने वाले तमिलनाडु एसटीएफ के स्पेशलिस्ट जे सुरेश और उनके सहयोगी विजय सुरेश ने वन विभाग के कर्मचारियों को जंगल की चुनौतियों के बीच खुद को जिंदा रखने का हुनर सिखाया। स्पेशलिस्ट जे सुरेश कोटद्वार में वन विभाग के कर्मचारियों को एडवांस फील्ड क्राफ्ट ट्रेनिंग देने आए थे। ट्रेनिंग का रविवार को समापन हो गया।
उत्तराखंड के जंगलों में तस्करी और वन कर्मियों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वन कर्मियों के पास अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं। कर्मचारियों को शिकारियों से जूझते वक्त अपने बचाव करने की बेसिक ट्रेनिंग भी नहीं दी जाती है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की मदद से अब उत्तराखंड के वन कर्मियों को विषम परिस्थितियों के बीच घिरे होने पर जिंदा बाहर निकलने का बेसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का रविवार को समापन हो गया।
प्रशिक्षण में 23 वन कर्मियों को जंगल की हर परिस्थितियों ने निपटने की ट्रेनिंग दी गई। रात्रि में पेट्रोलिंग करने, दिन में गश्त करने, संचार तंत्र, हथियार चलाने, जंगल में कई दिनों तक पानी भोजन न मिलने पर खुद को कैसे जिंदा रखने के गुर सिखाए। मुठभेड़ या फिर किसी जानवर के हमले में घायल साथी को सकुशल अस्पताल तक पहुंचाने के लिए रस्सी, कपड़ों, लकड़ी के सहारे कैसे स्ट्रेचर तैयार किया जा सकता है, इसकी ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के दौरान रेंज आफिसर सत्य प्रकाश कंडवाल, विक्रम सिंह तोमर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डा. आईपी बोयना मौजूद थे।
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उत्तराखंड के जंगलों में तस्करी और वन कर्मियों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वन कर्मियों के पास अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं। कर्मचारियों को शिकारियों से जूझते वक्त अपने बचाव करने की बेसिक ट्रेनिंग भी नहीं दी जाती है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की मदद से अब उत्तराखंड के वन कर्मियों को विषम परिस्थितियों के बीच घिरे होने पर जिंदा बाहर निकलने का बेसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का रविवार को समापन हो गया।
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प्रशिक्षण में 23 वन कर्मियों को जंगल की हर परिस्थितियों ने निपटने की ट्रेनिंग दी गई। रात्रि में पेट्रोलिंग करने, दिन में गश्त करने, संचार तंत्र, हथियार चलाने, जंगल में कई दिनों तक पानी भोजन न मिलने पर खुद को कैसे जिंदा रखने के गुर सिखाए। मुठभेड़ या फिर किसी जानवर के हमले में घायल साथी को सकुशल अस्पताल तक पहुंचाने के लिए रस्सी, कपड़ों, लकड़ी के सहारे कैसे स्ट्रेचर तैयार किया जा सकता है, इसकी ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के दौरान रेंज आफिसर सत्य प्रकाश कंडवाल, विक्रम सिंह तोमर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डा. आईपी बोयना मौजूद थे।
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