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भारी बारिश से गहली गांव में टूटी गोशाला, सड़कों को नुकसान
Updated Thu, 24 Aug 2017 10:44 PM IST
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कोटद्वार। क्षेत्र में हुई भारी बारिश से द्वारीखाल विकासखंड के गहली गांव में एक गोशाला ध्वस्त हो गई। इस दौरान गोशाला में बंधे मवेशी बाल-बाल बच गए। बारिश से दुगड्डा और यमकेश्वर विकासखंड में कई संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गए हैं। उधर कोटद्वार के आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों को बाढ़ के मलबे से निजात नहीं मिल पा रही है।
द्वारीखाल विकासखंड के गहली गांव में बुधवार सुबह भारी बारिश से वीरेंद्र प्रसाद डबराल पुत्र रेबतराम की गोशाला ध्वस्त हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि भारी बारिश से क्षेत्र में खेत, खलिहान और संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गए हैं। कूरीखाल कफल्डी निवासी बीरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि क्षेत्र में भारी बारिश से चरेख से धरगांव तक पांच किमी तक पूरी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगह पहाड़ी से मलबा आया है। स्कपर टूट गए हैं। सड़क पर आवाजाही करना कठिन हो गया है। द्वारीखाल विकासखंड के ठांगर निवासी सुरमान सिंह रावत ने जिलाधिकारी पौड़ी को पत्र भेजकर उनके गांव में आपदा से हुई क्षति का मुआवजा देने की मांग की है। कहा कि ठांगर में गबर सिंह के घर की सुरक्षा दीवार ढह गई है, जिससे उनके आवासीय भवन को खतरा पैदा हो गया है।
उधर, कोटद्वार के सर्वाधिक आपदा प्रभावित देवी रोड क्षेत्र में लोगों को बाढ़ के मलबे से निजात नहीं मिल रही है। गत तीन और चार अगस्त की रात को उफनाए पनियाली गदेरे से आई बाढ़ से तबाह हुए सीएसडी कैंटीन, आर्मी के एमटी कैंप की हालत भी अब तक सामान्य नहीं हो सकी है। यहां सेना के जवान 15 दिन से जेसीबी से मलबा हटाने में जुटे हैं, लेकिन हालात सामान्य होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। देवीरोड निवासी मन्नू गर्ग और महेंद्र सिंह का कहना है कि नगर पालिका और प्रशासन की ओर से सड़कों और आबादी का मलबा तो हटा दिया गया, लेकिन उनकी भूमिगत दुकानों में भरे पड़े मलबे को निकालने में किसी ने मदद नहीं की। समाजसेवी अनूप थपलियाल का कहना है कि लोग दुकानों का मलबा निकालकर देवीरोड पर मुख्य मार्ग पर छोड़ रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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द्वारीखाल विकासखंड के गहली गांव में बुधवार सुबह भारी बारिश से वीरेंद्र प्रसाद डबराल पुत्र रेबतराम की गोशाला ध्वस्त हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि भारी बारिश से क्षेत्र में खेत, खलिहान और संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गए हैं। कूरीखाल कफल्डी निवासी बीरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि क्षेत्र में भारी बारिश से चरेख से धरगांव तक पांच किमी तक पूरी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगह पहाड़ी से मलबा आया है। स्कपर टूट गए हैं। सड़क पर आवाजाही करना कठिन हो गया है। द्वारीखाल विकासखंड के ठांगर निवासी सुरमान सिंह रावत ने जिलाधिकारी पौड़ी को पत्र भेजकर उनके गांव में आपदा से हुई क्षति का मुआवजा देने की मांग की है। कहा कि ठांगर में गबर सिंह के घर की सुरक्षा दीवार ढह गई है, जिससे उनके आवासीय भवन को खतरा पैदा हो गया है।
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उधर, कोटद्वार के सर्वाधिक आपदा प्रभावित देवी रोड क्षेत्र में लोगों को बाढ़ के मलबे से निजात नहीं मिल रही है। गत तीन और चार अगस्त की रात को उफनाए पनियाली गदेरे से आई बाढ़ से तबाह हुए सीएसडी कैंटीन, आर्मी के एमटी कैंप की हालत भी अब तक सामान्य नहीं हो सकी है। यहां सेना के जवान 15 दिन से जेसीबी से मलबा हटाने में जुटे हैं, लेकिन हालात सामान्य होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। देवीरोड निवासी मन्नू गर्ग और महेंद्र सिंह का कहना है कि नगर पालिका और प्रशासन की ओर से सड़कों और आबादी का मलबा तो हटा दिया गया, लेकिन उनकी भूमिगत दुकानों में भरे पड़े मलबे को निकालने में किसी ने मदद नहीं की। समाजसेवी अनूप थपलियाल का कहना है कि लोग दुकानों का मलबा निकालकर देवीरोड पर मुख्य मार्ग पर छोड़ रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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