{"_id":"5c699707bdec22737361c60e","slug":"41550423815-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीसरे दिन भी प्राइवेट क्लीनिक और अस्पताल रहे बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीसरे दिन भी प्राइवेट क्लीनिक और अस्पताल रहे बंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के विरोध में कोटद्वार समेत जनपद के सभी निजी अस्पताल तीसरे दिन भी बंद रहे। निजी अस्पतालों के बंद होने से मरीजों को इलाज कराने के लिए राजकीय बेस अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। रविवार को सरकारी अस्पताल की ओपीडी भी बंद होने के कारण मरीजों की अस्पताल के इमरजेंसी में भीड़ लगी रही, लेकिन इमरजेंसी में केवल एक चिकित्सक होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ा।
वहीं आईएमए से जुड़े चिकित्सकों ने सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार उन पर जबरन सीईए कानून थोप रही है, जिससे अस्पताल संचालकों को परेशानी का सामना तो करना पड़ेगा, वहीं मरीजों के लिए इलाज कराना अत्यंत महंगा हो जाएगा।
आईएमए कोटद्वार के सदस्य डा. राजकुमार विज ने बताया कि सीईए अव्यवहारिक और अत्यंत महंगा है। इसके कारण प्राइवेट क्लीनिक इस कानून के तहत अपना पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। एक्ट में अपंजीकृत अस्पतालों को सील करने की व्यवस्था की गई है, जिससे निजी अस्पतालों के संचालकों ने सील होने से बचने के लिए स्वेच्छा से अपने क्लीनिक और अस्पताल बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के डाक्टरों ने सरकार को आईएमए की ओर से सीईए के स्थान पर प्रस्तावित उत्तराखंड हेल्थ केयर एक्ट लागू करने की मांग की है।
विज्ञापन
े
विज्ञापन
वहीं आईएमए से जुड़े चिकित्सकों ने सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार उन पर जबरन सीईए कानून थोप रही है, जिससे अस्पताल संचालकों को परेशानी का सामना तो करना पड़ेगा, वहीं मरीजों के लिए इलाज कराना अत्यंत महंगा हो जाएगा।
विज्ञापन
आईएमए कोटद्वार के सदस्य डा. राजकुमार विज ने बताया कि सीईए अव्यवहारिक और अत्यंत महंगा है। इसके कारण प्राइवेट क्लीनिक इस कानून के तहत अपना पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। एक्ट में अपंजीकृत अस्पतालों को सील करने की व्यवस्था की गई है, जिससे निजी अस्पतालों के संचालकों ने सील होने से बचने के लिए स्वेच्छा से अपने क्लीनिक और अस्पताल बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के डाक्टरों ने सरकार को आईएमए की ओर से सीईए के स्थान पर प्रस्तावित उत्तराखंड हेल्थ केयर एक्ट लागू करने की मांग की है।
विज्ञापन
े