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Kotdwar News: कालागढ़ में हमलावर बाघ की तलाश में लगाए थ्रीडी कैमरे और ड्रोन

Fri, 02 Aug 2024 10:35 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 02 Aug 2024 10:35 PM IST
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3D cameras and drones installed in search of attacking tiger in Kalagarh

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कालागढ़/कोटद्वार। एक ओर जहां कोटद्वार दुगड्डा के बीच हाईवे पर हाथी की धमक थमने का नाम नहीं ले रही है, वहीं कालागढ़ में बाघ की दहशत बरकरार है। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) कालागढ़ केंद्रीय कॉलोनी में महिला की मौत के बाद बाघ की तलाश में वन विभाग ने स्वचालित कैमरे, ड्रोन लगाते हुए हाथियों से गश्त तेज कर दी है। घटनास्थल के निकट वन विभाग को बाघ के पंजे के निशान मिले हैं।



दो दिन पूर्व कालागढ़ की केंद्रीय कॉलोनी में बाघ ने हाइडिलकर्मी नितिन कुमार की 23 वर्षीय पत्नी टीना पर हमला कर उसे मार डाला था। इस घटना के बाद वन विभाग ने केंद्रीय कॉलोनी व हाथीशाला के पीछे स्वचालित 10 कैमरे लगाए हैं। इसके साथ ही दो थ्रीडी कैमरे भी लगाए गए हैं। वन विभाग ड्रोन व हाथियों की मदद से केंद्रीय कॉलोनी का पूरा क्षेत्र छान रहा है। गश्ती दल के पांच सदस्यों के समूह जगह-जगह बाघ की तलाश में लगे हुए हैं। वन विभाग के अधिकारी आमजनता से घरों से बाहर न निकलने की अपील कर रहे हैं। उधर, आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष परशुराम समेत क्षेत्रवासियों ने वन विभाग के अधिकारियों से मिलकर केंद्रीय कॉलोनी और इसके आसपास के क्षेत्र में झाड़ियों की तत्काल सफाई कराने की मांग दोहराई है।
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बाघ के पंजे के निशान मिले

कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी आकाश गंगवार (आईएफएस) ने बताया कि बाघ कैमरा ट्रैप में कहीं भी नजर नहीं आया है। घटनास्थल के आसपास बाघ के पंजों के निशान मिले हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कॉलोनी में लोगों से घरों में ही रहने की अपील की जा रही है। वन विभाग का गश्ती दल आबादी क्षेत्र एवं उससे लगे वन क्षेत्र में बाघ की तलाश में जुटा हुआ है। वह स्वयं क्षेत्र में जाकर अभियान पर नजर रखे हुए हैं।
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कोटद्वार में हाईवे पर धमका हाथी, अफरातफरी मची



काेटद्वार। कोटद्वार पौड़ी हाईवे पर पांचवें मील के पास लैंसडौन वन प्रभाग के जंगलों से हाथी की धमक थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार शाम को लगातार दूसरे दिन हाथी जंगल से निकलकर हाईवे पर चहलकदमी करने लगा, जिससे वाहनों के पहिये थम गए। करीब आधा घंटा हाईवे जाम हो गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने उसे बमुश्किल जंगल की ओर खदेड़ा। प्रत्यक्षदर्शी विनोद कुमार भट्ट ने बताया कि शुक्रवार को हाथी सड़क पर आराम से चहलकदमी करते हुए बीच-बीच में बांस की पत्तियां खा रहा था। पास के वाहनों को वह दौड़ा भी रहा था। उसके जंगल में जाने के बाद ही यातायात सुचारु हो सका। बृहस्पतिवार को वह तड़के सड़क पर आ गया था, जबकि शुक्रवार शाम करीब पांच बजे वह हाईवे पर धमका। राहगीरों और क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से क्षेत्र में वाहन से गश्त शुरू करने की मांग की है। कहा कि हाथी कभी भी राह चलते वाहनों पर हमला कर सकता है। डीएफओ नवीन पंत का कहना है कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में वाहन से गश्त कराई जाएगी।
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