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पुलिस के पहरे में किया आशाओं ने किया धरना-प्रदर्शन
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:38 PM IST
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कोटद्वार। गत 17 अक्तूबर से अपनी पांच सूत्री मांगों के लिए कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकत्रियों को सोमवार को पुलिस फोर्स की कड़ी निगरानी में धरना-प्रदर्शन करना पड़ा। प्रशासन को आशंका थी कि कहीं आशा कार्यकत्री सीएम की जनसभा में नारेबाजी कर हंगामा खड़ा न कर दें। पुलिस के पहरे में ही आशा कार्यकत्रियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उनकी मांगें पूरी करने की मांग की। सीएम के कोटद्वार से जाने के बाद ही आशा कार्यकत्रियों को धरनास्थल से जाने की अनुमति दी गई।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कोटद्वार दौरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली थी। उन्होंने धरना प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकत्रियों को पहले से ही प्रदर्शन न करने की हिदायत दी थी। सोमवार सुबह जब आशाएं कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुईं तो उन पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया लगा था। सादी वर्दी में भी महिला पुलिस कर्मी तैनात कर रखे थे। आशा कार्यकत्री यूनियन की दुगड्डा ब्लाक की अध्यक्ष प्रभा चौधरी ने कहा कि आशाएं अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन प्रदेश सरकार और प्रशासन की ओर से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। कहा कि मुख्यमंत्री के कोटद्वार आने पर आशाओं में एक उम्मीद जगी, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने आशाओं पर पहरा बिठा दिया।
दरअसल गत 10 नवंबर को सतपुली के चमोलीसैंण में आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की जनसभा में नारेबाजी कर हंगामा किया था, जिससे पुलिस-प्रशासन ने कोटद्वार में सीएम के कार्यक्रम को देखते हुए सोमवार को आशा कार्यकत्रियों के धरना स्थल पर कड़ा पहरा बिठा दिया। धरनास्थल पर सोमवार सुबह ही दो पुलिस उपनिरीक्षकों की अगुवाई में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सीएम के आने से दो घंटे पहले से तहसील में जम गए। आशा कार्यकत्रियों को सीएम के हेलीकाफ्टर के कोटद्वार से देहरादून के लिए उड़ने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। बताया कि प्रशासन की ओर से आशा कार्यकत्रियों के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सचिव रंजना कोटनाला और भागीरथी भंडारी ने सीएम की वापसी के दौरान उनसे हैलीपैड पर मुलाकात की। सीएम ने समस्याओं के निराकरण को एक माह का समय मांगा है।
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सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कोटद्वार दौरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली थी। उन्होंने धरना प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकत्रियों को पहले से ही प्रदर्शन न करने की हिदायत दी थी। सोमवार सुबह जब आशाएं कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुईं तो उन पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया लगा था। सादी वर्दी में भी महिला पुलिस कर्मी तैनात कर रखे थे। आशा कार्यकत्री यूनियन की दुगड्डा ब्लाक की अध्यक्ष प्रभा चौधरी ने कहा कि आशाएं अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन प्रदेश सरकार और प्रशासन की ओर से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। कहा कि मुख्यमंत्री के कोटद्वार आने पर आशाओं में एक उम्मीद जगी, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने आशाओं पर पहरा बिठा दिया।
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दरअसल गत 10 नवंबर को सतपुली के चमोलीसैंण में आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की जनसभा में नारेबाजी कर हंगामा किया था, जिससे पुलिस-प्रशासन ने कोटद्वार में सीएम के कार्यक्रम को देखते हुए सोमवार को आशा कार्यकत्रियों के धरना स्थल पर कड़ा पहरा बिठा दिया। धरनास्थल पर सोमवार सुबह ही दो पुलिस उपनिरीक्षकों की अगुवाई में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सीएम के आने से दो घंटे पहले से तहसील में जम गए। आशा कार्यकत्रियों को सीएम के हेलीकाफ्टर के कोटद्वार से देहरादून के लिए उड़ने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। बताया कि प्रशासन की ओर से आशा कार्यकत्रियों के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सचिव रंजना कोटनाला और भागीरथी भंडारी ने सीएम की वापसी के दौरान उनसे हैलीपैड पर मुलाकात की। सीएम ने समस्याओं के निराकरण को एक माह का समय मांगा है।
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