फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों को बाढ़ और कटाव का खतरा

सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों को बाढ़ और कटाव का खतरा

Mon, 14 Aug 2017 10:04 PM IST
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:04 PM IST
विज्ञापन
सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों को बाढ़ और कटाव का खतरा
कोटद्वार। पश्चिमी ध्रुवपुर के ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से सुखरो नदी के तटवर्ती भागों का सर्वे कराने और मजबूत चेक डैम बनाने की मांग की है। कहा कि सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों पर भू कटाव और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। समय रहते यदि इंतजाम नहीं हुए तो भारी बारिश में तबाही हो सकती है। खेत खलिहानों की सुरक्षा बड़ा सवाल बन गया है।
विज्ञापन

विद्या दत्त जदली की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने गत तीन और चार अगस्त की रात को बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ से उपजे हालात और सुखरौ नदी से भू कटाव पर चिंता जताई। लोगों ने कहा कि भीषण बाढ़ से सुखरौ नदी के किनारे के सभी चेक डैम बह गए हैं, ऐसे में ध्रुवपुर, पदमपुर, सिमलचौड़, नयागांव को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। भारी बारिश में नदी का पानी आबादी में घुसने का डर बना है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से आपदा प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे कर मजबूत चेक डैम बनाने की मांग की गई।
विज्ञापन

बैठक में जगदीश सिंह बिष्ट, चंद्रप्रकाश, आनंद सिंह राणा, विजयपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, राकेश सिंह, अर्जुन सिंह, रमेश जखमोला, ओमप्रकाश जदली, सुनील जखवाल, वीरेंद्र असवाल, देवीप्रसाद, पीतांबर जखवाल, गोविंद सिंह भंडारी, रोशनलाल व धर्मानंद आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


तेेलीसोत गदेरे की सुध न लेने से ग्रामीणों में रोष
किशनपुर (भाबर)। गत तीन और चार अगस्त की रात आई भीषण बाढ़ से भाबर के तेेलीसोत गदेरे के तटवर्ती गांवों में बड़े पैमाने पर खेत खलिहानों में कटाव हुआ है। कोटद्वार-चिलरखाल मार्ग पर तेेलीसोत गदेरे पर बना रपटा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। रपटे की सुध न लेने से क्षेत्रवासियों में रोष बना हुआ है।

ग्रामीण कुंवर सिंह, चंद्रकांता केष्टवाल, बीरेंद्र प्रसाद, विमल प्रसाद शुक्ला, मगनपुर के प्रधान विजय ध्यानी ने कहा कि तेेलीसोत गदेरे से बड़े पैमाने पर तटबंधों को नुकसान हुआ है। चिलरखाल मार्ग पर बने रपटे की दस दिन बाद भी सुध न लिए जाने से यहां पर आवाजाही करना खतरनाक बना है। ग्रामीणों ने तेलीसोत गदेरे पर पुल का निर्माण करने की मांग की। बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed