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खोह नदी से नहीं हटे बोल्डर, बाढ़ का खतरा बरकरार
Updated Fri, 08 Jun 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। रिवर ट्रेनिंग पालिसी-2016 के तहत खोह नदी के चैनलाइजेशन में कई खामियां बनी हुई हैं। खननकारी यहां से रेत, बजरी और उपखनिज तो ले गए, लेकिन भारी भरकम बोल्डर नदी के बीच में ही छोड़ दिए गए हैं, जो आगामी बरसात में खतरे का सबब बन सकते हैं। ग्रामीणों ने इन बोल्डरों को नदी तटों पर लगाने की मांग की है।
रिवर ट्रेनिंग पालिसी-2016 के तहत प्रशासन की ओर से कोटद्वार की खोह और सुखरो नदी में खनन के पट्टे जारी किए गए हैं। गत एक मई को चैनलाइजेशन के कार्य में जेसीबी और पोकलेन मशीनों का प्रयोग प्रतिबंधित होने के कारण खोह में आवंटित खनन पट्टों पर काम बंद कर दिया गया है। खननकारियों का कहना है कि उन्हें श्रमिक न मिलने के कारण नदी से खनन व चुगान कार्य नहीं हो पा रहा है। एक मई से पूर्व नदी में जेेसीबी और पोकलेन से किए गए खनन कार्य के दौरान खननकारियों ने रेत, बजरी और अन्य उपखनिज तो निकाल लिया, लेकिन भारी बोल्डर को हटाकर नदी के किनारे नहीं लगाया। इससे आने वाली बरसात में दोनों ओर की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है।
काशीरामपुर तल्ला निवासी सूरज प्रसाद कांति, राजेश नौटियाल व महानंद ध्यानी का कहना है प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी को बरसात से पूर्व सर्वे कराने की बात कही थी, लेकिन सर्वे नहीं किया गया। हालत यह है कि नदी के बीचोंबीच खननकारियों द्वारा छोड़े गए बोल्डर बरसात में तबाही मचा सकते हैं, जिन्हें नदी के किनारे करने की जरूरत है।
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बोल्डरों को सुरक्षा दीवार के लिए किनारे लगाया जाना था, लेकिन शासन के निर्देश के बाद नदियों में भारी मशीनों का प्रयोग नहीं हो सकता है, इसलिए बोल्डरों को नदी के तट पर नहीं लगाया जा सका।
-राकेश चंद्र तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।
-फोटो
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रिवर ट्रेनिंग पालिसी-2016 के तहत प्रशासन की ओर से कोटद्वार की खोह और सुखरो नदी में खनन के पट्टे जारी किए गए हैं। गत एक मई को चैनलाइजेशन के कार्य में जेसीबी और पोकलेन मशीनों का प्रयोग प्रतिबंधित होने के कारण खोह में आवंटित खनन पट्टों पर काम बंद कर दिया गया है। खननकारियों का कहना है कि उन्हें श्रमिक न मिलने के कारण नदी से खनन व चुगान कार्य नहीं हो पा रहा है। एक मई से पूर्व नदी में जेेसीबी और पोकलेन से किए गए खनन कार्य के दौरान खननकारियों ने रेत, बजरी और अन्य उपखनिज तो निकाल लिया, लेकिन भारी बोल्डर को हटाकर नदी के किनारे नहीं लगाया। इससे आने वाली बरसात में दोनों ओर की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है।
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काशीरामपुर तल्ला निवासी सूरज प्रसाद कांति, राजेश नौटियाल व महानंद ध्यानी का कहना है प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी को बरसात से पूर्व सर्वे कराने की बात कही थी, लेकिन सर्वे नहीं किया गया। हालत यह है कि नदी के बीचोंबीच खननकारियों द्वारा छोड़े गए बोल्डर बरसात में तबाही मचा सकते हैं, जिन्हें नदी के किनारे करने की जरूरत है।
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बोल्डरों को सुरक्षा दीवार के लिए किनारे लगाया जाना था, लेकिन शासन के निर्देश के बाद नदियों में भारी मशीनों का प्रयोग नहीं हो सकता है, इसलिए बोल्डरों को नदी के तट पर नहीं लगाया जा सका।
-राकेश चंद्र तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।
-फोटो