{"_id":"5ccdc46bbdec220734073621","slug":"201556989035-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यटन दृष्टि से किया जाए पर्यटक स्थल भीमपकोड़ा का विकास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यटन दृष्टि से किया जाए पर्यटक स्थल भीमपकोड़ा का विकास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लैंसडौन। नागरिकों ने लैंसडौन के पर्यटक स्थल भीम पकोड़ा को पर्यटन दृष्टि से सजाने संवारने की मांग छावनी परिषद से की है। इस संबंध में नागरिकों ने छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी से भी मुलाकात की।
सामाजिक कार्यकर्ता हितेश शर्मा, संजय कन्नौजिया, सक्षम कुमार ने कहा कि लैंसडौन सैन्य नगर के साथ पर्यटन नगरी भी है। जहां पर्यटकों के आने का सिलसिला लगा रहता है। लैंसडौन के पर्यटक स्थल भीमपकोड़ा को देखने के लिए भी पर्यटकों को तांता लगा रहता है। जहां चार छोटे पत्थरों पर एक 100 टन का विशालकाय पत्थर कई सालों से टिका है। बडे- बड़े भूकंपों व तेज आंधी तूफानों के बाद भी विशालकाय पत्थर की स्थिति यथावत है। इस जगह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह विशालकाय पत्थर एक अंगुली से हिल जाता है। इसी को देखने के लिए देश के कई प्रांतों से पर्यटक यहां आते है। लेकिन इस जगह छावनी परिषद ने किसी भी प्रकार का विकास नहीं किया है। इस स्थल पर न तो पर्यटकों के बैठने के लिए कुर्सी है और न ही किसी प्रकार की कैंटीन, पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। पर्यटक जिस उत्सुकता के साथ भीमपकोड़ा देखने आते है वे यहां की व्यवस्था देखकर मायूस हो जाते है। उन्होंने कहा कि अगर छावनी परिषद पर्यटन दृष्टि से इस जगह का विकास करे तो इससे उन्हें राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। साथ ही स्थानीय युवकों को रोजगार भी मिलेगा। इस संबंध में नागरिकों ने छावनी परिषद लैंसडौन के मुख्य अधिशासी अधिकारी भूपति रोहित मुलाकात कर इस पर्यटन स्थल पर पर्यटन की दृष्टि से विकास करने की मांग की है।
विज्ञापन
सामाजिक कार्यकर्ता हितेश शर्मा, संजय कन्नौजिया, सक्षम कुमार ने कहा कि लैंसडौन सैन्य नगर के साथ पर्यटन नगरी भी है। जहां पर्यटकों के आने का सिलसिला लगा रहता है। लैंसडौन के पर्यटक स्थल भीमपकोड़ा को देखने के लिए भी पर्यटकों को तांता लगा रहता है। जहां चार छोटे पत्थरों पर एक 100 टन का विशालकाय पत्थर कई सालों से टिका है। बडे- बड़े भूकंपों व तेज आंधी तूफानों के बाद भी विशालकाय पत्थर की स्थिति यथावत है। इस जगह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह विशालकाय पत्थर एक अंगुली से हिल जाता है। इसी को देखने के लिए देश के कई प्रांतों से पर्यटक यहां आते है। लेकिन इस जगह छावनी परिषद ने किसी भी प्रकार का विकास नहीं किया है। इस स्थल पर न तो पर्यटकों के बैठने के लिए कुर्सी है और न ही किसी प्रकार की कैंटीन, पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। पर्यटक जिस उत्सुकता के साथ भीमपकोड़ा देखने आते है वे यहां की व्यवस्था देखकर मायूस हो जाते है। उन्होंने कहा कि अगर छावनी परिषद पर्यटन दृष्टि से इस जगह का विकास करे तो इससे उन्हें राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। साथ ही स्थानीय युवकों को रोजगार भी मिलेगा। इस संबंध में नागरिकों ने छावनी परिषद लैंसडौन के मुख्य अधिशासी अधिकारी भूपति रोहित मुलाकात कर इस पर्यटन स्थल पर पर्यटन की दृष्टि से विकास करने की मांग की है।
विज्ञापन