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कोटद्वार में सपना बन गया आधुनिक बस अड्डा
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कोटद्वार। आईएसबीटी की तर्ज पर पीपीपी मोड में मोटर नगर में प्रस्तावित बस अड्डे का निर्माण सपना बनकर रह गया है। छह साल में भी बस अड्डा आकार नहीं ले सका है। कार्यदायी संस्था बस अड्डे की जगह पर नींव का गड्ढा खोदकर चलती बनी , जिसका लाभ वाहनों को पार्किंग के लिए भी नहीं मिल पा रहा है। बढ़ते जनदबाव के कारण नगर निगम अब कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त करने की तैयारी कर रहा है।
तत्कालीन नगर पालिका परिषद ने 23 मार्च, 2013 को पीपीपी मोड पर मोटर नगर में आधुनिक बस टर्मिनल बनाने का कार्य एक निजी संस्था को सौंपा था। संस्था ने मोटर नगर में बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू किया। पालिका ने मोटर नगर की 1.838 हेक्टेयर भूमि में से 1.5034 हेक्टेयर भूमि कंपनी को मुहैया करा दी गई। शर्तो के अनुरूप मार्च, 2015 तक बस अड्डे का निर्माण पूरा कर नगर पालिका को सौंपा जाना था। करार होने के छह माह बाद तक नगरपालिका ने मोटरनगर का भूमि उपयोग ही परिवर्तित नहीं किया। करीब छह माह बाद भूमि उपयोग तो परिवर्तित हो गया, लेकिन, जिस स्थान पर बस अड्डा निर्माण होना था, वहां पहले से ही दुकानें मौजूद थी, जिससे मसला लटका रहा।
नगर पालिका तय शर्तों के अनुरूप मोटर नगर की पूरी भूमि खाली करवाकर कार्यदायी संस्था को नहीं सौंप पाई। नतीजतन बस अड्डे का निर्माण अधर में लटक गया और यही स्थिति आज भी बरकरार है। क्षेत्रीय जनता और परिवहन कंपनियों का कहना है कि उन्हें बस अड्डे के नाम पर ऐसा गड्ढा मिला है, जो अब किसी काम का नहीं रह गया। पहले कम से कम यहां पर वाहन की पार्किंग तो हो जाती थी।
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नगर निगम बनने के बाद गत 15 दिसंबर को दूसरी बोर्ड बैठक में मोटर नगर का प्रस्तावित बस अड्डा एक बार फिर चर्चा में आया। इसके लिए सभी पार्षदों ने एक मत होकर मोटर नगर का अनुबंध समाप्त करने का प्रस्ताव पास किया। अब देखना यह है कि नगर निगम इस समस्या से पार पाता है या नहीं।
सिताबपुर औद्योगिक आस्थान से मिली थी मोटर नगर की जमीन
1957 में सिताबपुर में औद्योगिक आस्थान खोला गया। वर्ष 1976 में औद्योगिक आस्थान से 1.838 हेक्टेयर भूमि नगर पालिका को दे दी गई। नगर पालिका की यह भूमि वर्षों तक बंजर रही और यहां छोटे-बड़े वाहनों की पार्किंग होती थी। राज्य गठन के बाद आबादी बढ़ी और सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने लगा। आए दिन जाम को देखते हुए वर्ष 2010 में औद्योगिक आस्थान की दीवार को तोड़कर मोटर नगर में दुकानें बनाई गई और पटेल मार्ग स्थित कुछ दुकानों को वहां शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने नया ट्रैफिक प्लान बनाकर यहां से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए जीप-टैक्सियों और जीएमओयू की बसों का संचालन करवाया। अब हाल यह है कि इन वाहनों का संचालन सड़क से ही हो रहा है।
कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। अगले हफ्ते तक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। राजेश नैथानी, सहायक नगर आयुक्त कोटद्वार
तत्कालीन नगर पालिका परिषद ने 23 मार्च, 2013 को पीपीपी मोड पर मोटर नगर में आधुनिक बस टर्मिनल बनाने का कार्य एक निजी संस्था को सौंपा था। संस्था ने मोटर नगर में बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू किया। पालिका ने मोटर नगर की 1.838 हेक्टेयर भूमि में से 1.5034 हेक्टेयर भूमि कंपनी को मुहैया करा दी गई। शर्तो के अनुरूप मार्च, 2015 तक बस अड्डे का निर्माण पूरा कर नगर पालिका को सौंपा जाना था। करार होने के छह माह बाद तक नगरपालिका ने मोटरनगर का भूमि उपयोग ही परिवर्तित नहीं किया। करीब छह माह बाद भूमि उपयोग तो परिवर्तित हो गया, लेकिन, जिस स्थान पर बस अड्डा निर्माण होना था, वहां पहले से ही दुकानें मौजूद थी, जिससे मसला लटका रहा।
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नगर पालिका तय शर्तों के अनुरूप मोटर नगर की पूरी भूमि खाली करवाकर कार्यदायी संस्था को नहीं सौंप पाई। नतीजतन बस अड्डे का निर्माण अधर में लटक गया और यही स्थिति आज भी बरकरार है। क्षेत्रीय जनता और परिवहन कंपनियों का कहना है कि उन्हें बस अड्डे के नाम पर ऐसा गड्ढा मिला है, जो अब किसी काम का नहीं रह गया। पहले कम से कम यहां पर वाहन की पार्किंग तो हो जाती थी।
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नगर निगम बनने के बाद गत 15 दिसंबर को दूसरी बोर्ड बैठक में मोटर नगर का प्रस्तावित बस अड्डा एक बार फिर चर्चा में आया। इसके लिए सभी पार्षदों ने एक मत होकर मोटर नगर का अनुबंध समाप्त करने का प्रस्ताव पास किया। अब देखना यह है कि नगर निगम इस समस्या से पार पाता है या नहीं।
सिताबपुर औद्योगिक आस्थान से मिली थी मोटर नगर की जमीन
1957 में सिताबपुर में औद्योगिक आस्थान खोला गया। वर्ष 1976 में औद्योगिक आस्थान से 1.838 हेक्टेयर भूमि नगर पालिका को दे दी गई। नगर पालिका की यह भूमि वर्षों तक बंजर रही और यहां छोटे-बड़े वाहनों की पार्किंग होती थी। राज्य गठन के बाद आबादी बढ़ी और सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने लगा। आए दिन जाम को देखते हुए वर्ष 2010 में औद्योगिक आस्थान की दीवार को तोड़कर मोटर नगर में दुकानें बनाई गई और पटेल मार्ग स्थित कुछ दुकानों को वहां शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने नया ट्रैफिक प्लान बनाकर यहां से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए जीप-टैक्सियों और जीएमओयू की बसों का संचालन करवाया। अब हाल यह है कि इन वाहनों का संचालन सड़क से ही हो रहा है।
कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। अगले हफ्ते तक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। राजेश नैथानी, सहायक नगर आयुक्त कोटद्वार