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दाई मालन नहर से पर्याप्त पानी न मिलने पर भड़के किसान, आक्रोश जताया
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:56 PM IST
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कोटद्वार। अखिल भारतीय किसान सभा की मगनपुर में हुई बैठक में दाई मालन नहर से किसानों को पर्याप्त सिंचाई का पानी न मिलने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। किसानों ने सिंचाई विभाग पर मलबे से पटी मालन नहर की सफाई न करने और पर्याप्त सिंचाई का पानी उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिन ढलते ही मालन नहर का पानी बंद कर नदी में छोड़ दिया जाता है, जिससे किसानों को धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
किसान सभा के संरक्षक जीएस नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया गया। कहा गया कि कण्वाश्रम से ही दाई मालन नहर का बुरा हाल है। नहरों पर लगे ताश बुरी हालत में हैं। जितना पानी नहर में छोड़ा जा रहा है, वह ढालवाले क्षेत्र में जा रहा है। कलालघाटी में दो तिहाई से अधिक पानी बिजनौर के गांवों में जा रहा है, जबकि किशनपुर और ढोका क्षेत्र की नहर में 20 फीसदी पानी छोड़ा जा रहा है। इसी क्षेत्र में सर्वाधिक गांवों में खेती हो रही है।
काश्तकार राजेंद्र प्रसाद डबराल, सुखपाल सिंह, रमेश नेगी, राजेंद्र जोशी, जेपी बहुखंडी और डीएस नेगी ने कहा कि कलालघाटी से दाहिनी ओर की नहर से भाबर के त्रिलोकपुर, मगनपुर, किशनपुर, रामदयालपुर, तेलीबाड़ा, श्रीरामपुर, लूथापुर, बालागंज पश्चिमी, जशोधरपुर और सिगड्डी के गांव पड़ते हैं। सिंचाई विभाग की अव्यस्था के चलते सिंचाई का पानी टेल के गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नदी में उफान आने की आशंका से शाम को पांच बजे ही नहर का पानी बंदकर मालन नदी में छोड़ दिया जाता है। काश्तकारों का कहना है कि कलालघाटी से किशनपुर की जोर जाने वाली ब्रांच नहर का मलबा तक साफ नहीं किया गया है। पर्याप्त सिंचाई का पानी न मिलने से काश्तकार भड़के हुए हैं।
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दाई मालन नहर का पानी रात को नदी के उफनाने की आशंका के चलते बंद कर दिया जाता है। जल्द ही दाई मालन नहर का मुआयना कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
-सुधीर मोहन, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा।
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किसान सभा के संरक्षक जीएस नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया गया। कहा गया कि कण्वाश्रम से ही दाई मालन नहर का बुरा हाल है। नहरों पर लगे ताश बुरी हालत में हैं। जितना पानी नहर में छोड़ा जा रहा है, वह ढालवाले क्षेत्र में जा रहा है। कलालघाटी में दो तिहाई से अधिक पानी बिजनौर के गांवों में जा रहा है, जबकि किशनपुर और ढोका क्षेत्र की नहर में 20 फीसदी पानी छोड़ा जा रहा है। इसी क्षेत्र में सर्वाधिक गांवों में खेती हो रही है।
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काश्तकार राजेंद्र प्रसाद डबराल, सुखपाल सिंह, रमेश नेगी, राजेंद्र जोशी, जेपी बहुखंडी और डीएस नेगी ने कहा कि कलालघाटी से दाहिनी ओर की नहर से भाबर के त्रिलोकपुर, मगनपुर, किशनपुर, रामदयालपुर, तेलीबाड़ा, श्रीरामपुर, लूथापुर, बालागंज पश्चिमी, जशोधरपुर और सिगड्डी के गांव पड़ते हैं। सिंचाई विभाग की अव्यस्था के चलते सिंचाई का पानी टेल के गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नदी में उफान आने की आशंका से शाम को पांच बजे ही नहर का पानी बंदकर मालन नदी में छोड़ दिया जाता है। काश्तकारों का कहना है कि कलालघाटी से किशनपुर की जोर जाने वाली ब्रांच नहर का मलबा तक साफ नहीं किया गया है। पर्याप्त सिंचाई का पानी न मिलने से काश्तकार भड़के हुए हैं।
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दाई मालन नहर का पानी रात को नदी के उफनाने की आशंका के चलते बंद कर दिया जाता है। जल्द ही दाई मालन नहर का मुआयना कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
-सुधीर मोहन, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा।