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सनेह की कई हेक्टेयर जमीन खोह नदी में समाई, आबादी को भी खतरा
Updated Thu, 17 Aug 2017 10:27 PM IST
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कोटद्वार। गत तीन और चार अगस्त की रात को बादल फटने से उफनाई खोह नदी ने सनेह पट्टी के गांवों में कई हेक्टेयर खेती की जमीन लील ली है। काश्तकारों के सामने अपनी खेती को भूकटाव से बचाना चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द ही सुरक्षा के इंतजाम नहीं हुए तो खोह नदी खेतों को काटकर आबादी तक पहुंच जाएगी। क्षेत्रीय विधायक और वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत के निर्देश पर विभाग ने भूकटाव को रोकने के लिए वायरक्रेट डालने शुरू कर दिए हैं।
खोह नदी के कटाव से सनेह गांव को खतरा पैदा हो गया है। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला ने बताया कि तीन और चार अगस्त की आपदा से सनेह से लेकर सिगड्डी तक भाबर में बरसाती नदियों के किनारे बसी आबादी और खेती को बड़ा नुकसान हुआ है। सनेह गांव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। शहर में हुए जानमाल के नुकसान ने जहां सबका ध्यान आकर्षित किया, वहीं ग्रामीण अंचलों पर अब फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खोह नदी के किनारे बसे सनेह पट्टी के हर गांव को भूकटाव और बाढ़ से नुकसान हुआ है। सनेह में कई हेक्टेयर खेती की जमीन नदी ने अपनी चपेट में ले लिया, अब आबादी को खतरा पैदा हो गया है। बताया कि वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने पूरे इलाके का भ्रमण कर सिंचाई विभाग को तत्काल भूकटाव रोकने के लिए इंतजाम करने को कहा है।
सिंचाई विभाग के उपखंड अधिकारी सीपी भट्ट ने बताया कि पनियाली गदेरे के बाद अब खोह नदी में खेती और आबादी की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। वहां पर युद्धस्तर पर वायरक्रेट डाले जा रहे हैं।
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बालासौड़ में बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा
कोटद्वार। बालासौड़ की प्रधान बसंती देवी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अब तक उनके गांव के आपदा प्रभावितों की सुध नहीं ली गई है। कहा कि उनकी ग्राम पंचायत में सात परिवार आपदा की चपेट में आए थे। जिनके घर मलबे से पट गए। खाने का सामान तक नहीं बचा। प्रशासन ने पटवारी से मौका मुआयना भी करवाया, लेकिन अब तक उन्हें राहत सामग्री नहीं मिली। कहा कि आपदा से पीड़ित परिवारों की सूची और फोटोग्राफ पट्टी पटवारी को दिए जा चुके हैं। प्रधान ने चेतावनी दी है कि जल्द ही उनकी ग्राम पंचायत के पीड़ितों को राहत सामग्री और मुआवजा राशि नहीं दी गई तो वह पीड़ित परिवारों के साथ धरने पर बैठने को मजबूर होंगी।
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खोह नदी के कटाव से सनेह गांव को खतरा पैदा हो गया है। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला ने बताया कि तीन और चार अगस्त की आपदा से सनेह से लेकर सिगड्डी तक भाबर में बरसाती नदियों के किनारे बसी आबादी और खेती को बड़ा नुकसान हुआ है। सनेह गांव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। शहर में हुए जानमाल के नुकसान ने जहां सबका ध्यान आकर्षित किया, वहीं ग्रामीण अंचलों पर अब फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खोह नदी के किनारे बसे सनेह पट्टी के हर गांव को भूकटाव और बाढ़ से नुकसान हुआ है। सनेह में कई हेक्टेयर खेती की जमीन नदी ने अपनी चपेट में ले लिया, अब आबादी को खतरा पैदा हो गया है। बताया कि वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने पूरे इलाके का भ्रमण कर सिंचाई विभाग को तत्काल भूकटाव रोकने के लिए इंतजाम करने को कहा है।
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सिंचाई विभाग के उपखंड अधिकारी सीपी भट्ट ने बताया कि पनियाली गदेरे के बाद अब खोह नदी में खेती और आबादी की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। वहां पर युद्धस्तर पर वायरक्रेट डाले जा रहे हैं।
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बालासौड़ में बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा
कोटद्वार। बालासौड़ की प्रधान बसंती देवी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अब तक उनके गांव के आपदा प्रभावितों की सुध नहीं ली गई है। कहा कि उनकी ग्राम पंचायत में सात परिवार आपदा की चपेट में आए थे। जिनके घर मलबे से पट गए। खाने का सामान तक नहीं बचा। प्रशासन ने पटवारी से मौका मुआयना भी करवाया, लेकिन अब तक उन्हें राहत सामग्री नहीं मिली। कहा कि आपदा से पीड़ित परिवारों की सूची और फोटोग्राफ पट्टी पटवारी को दिए जा चुके हैं। प्रधान ने चेतावनी दी है कि जल्द ही उनकी ग्राम पंचायत के पीड़ितों को राहत सामग्री और मुआवजा राशि नहीं दी गई तो वह पीड़ित परिवारों के साथ धरने पर बैठने को मजबूर होंगी।