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गोखले मार्ग पर पसरे फड़ वाले, कैसे गुजरेंगे वाहन
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कोटद्वार। शहर के मुख्य मार्गोें पर पुलिस-प्रशासन और नगर निगम की लाख कोशिश के बाद भी अतिक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे ज्यादा अतिक्रमण की चपेट में शहर का गोखले मार्ग, स्टेशन रोड और जिला परिषद मार्केट है। हालात यह है कि अतिक्रमण के चलते गोखले मार्ग पर वाहनों का संचालन तो दूर, लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
गोखले मार्ग पर दुकानों के आगे सड़क तक फैले फड़ और ठेली वालों पर पुलिस, प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई का कोई भय नहीं रह गया है। इस बीच लोकसभा चुनाव में पुलिस और प्रशासन की व्यस्तता का भी अतिक्रमणकारियों ने खूब फायदा उठाया। परिणाम यह रहा कि सड़क से वाहनों का संचालन करना और करवाना परिवहन कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया। जीएमओयू और रोडवेज ने गोखले मार्ग से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वाहन संचालन के लिए हाथ खड़े कर दिए गए हैं। जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को अब लालबत्ती चौक खोलकर पूर्व की भांति ट्रैफिक संचालित करवाना चाहिए। गोखले मार्ग पर वाहनों का संचालन खतरे से खाली नहीं रह गया है।
दरअसल, पुलिस और प्रशासन ने पर्वतीय रूट के वाहनों के लिए गोखले मार्ग से वन वे व्यवस्था की हुई है। इस मार्ग पर सुबह से ही फड़ व ठेली वालों का जमघट लगने से जीएमओयू की बसें, ऑटो व दोपहिया वाहन रेंग कर चलते हैं। सड़क तक फड़ वालों की दुकान लगने से राहगीरों के लिए चलने तक की जगह नहीं बचती, ऐसे में वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बसें जब गोखले मार्ग से गुजरती हैं तो घंटों जाम में फंसी रहती हैं। कुछ यही हाल जिला परिषद मार्केट और स्टेशन रोड का भी है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम इन मार्गों पर अतिक्रमण हटाने पहुंचती है तो रेहड़ी ठेली वाले गलियों से दूसरी तरफ निकल जाते हैं, वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठान भी अपना सामान समेट लेते हैं। ऐसे में दो-चार चालान और कुछ ठेली वालों का सामान जब्त करके टीम वापस लौट जाती है।
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एसएसआई प्रदीप नेगी का कहना है कि गोखले मार्ग पर जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। उनका कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों की शह पर फड़ और रेहड़ी-ठेली वाले फिर से जम जाते हैं।
-फोटो
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गोखले मार्ग पर दुकानों के आगे सड़क तक फैले फड़ और ठेली वालों पर पुलिस, प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई का कोई भय नहीं रह गया है। इस बीच लोकसभा चुनाव में पुलिस और प्रशासन की व्यस्तता का भी अतिक्रमणकारियों ने खूब फायदा उठाया। परिणाम यह रहा कि सड़क से वाहनों का संचालन करना और करवाना परिवहन कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया। जीएमओयू और रोडवेज ने गोखले मार्ग से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वाहन संचालन के लिए हाथ खड़े कर दिए गए हैं। जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को अब लालबत्ती चौक खोलकर पूर्व की भांति ट्रैफिक संचालित करवाना चाहिए। गोखले मार्ग पर वाहनों का संचालन खतरे से खाली नहीं रह गया है।
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दरअसल, पुलिस और प्रशासन ने पर्वतीय रूट के वाहनों के लिए गोखले मार्ग से वन वे व्यवस्था की हुई है। इस मार्ग पर सुबह से ही फड़ व ठेली वालों का जमघट लगने से जीएमओयू की बसें, ऑटो व दोपहिया वाहन रेंग कर चलते हैं। सड़क तक फड़ वालों की दुकान लगने से राहगीरों के लिए चलने तक की जगह नहीं बचती, ऐसे में वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बसें जब गोखले मार्ग से गुजरती हैं तो घंटों जाम में फंसी रहती हैं। कुछ यही हाल जिला परिषद मार्केट और स्टेशन रोड का भी है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम इन मार्गों पर अतिक्रमण हटाने पहुंचती है तो रेहड़ी ठेली वाले गलियों से दूसरी तरफ निकल जाते हैं, वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठान भी अपना सामान समेट लेते हैं। ऐसे में दो-चार चालान और कुछ ठेली वालों का सामान जब्त करके टीम वापस लौट जाती है।
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एसएसआई प्रदीप नेगी का कहना है कि गोखले मार्ग पर जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। उनका कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों की शह पर फड़ और रेहड़ी-ठेली वाले फिर से जम जाते हैं।
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