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सिंचाई विभाग: बाढ़ से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत न होने से काश्तकार परेशान
Updated Sun, 02 Dec 2018 10:59 PM IST
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कोटद्वार। अमर उजाला चौपाल में सिंचाई विभाग से संबंधित मुद्दे सबसे ज्यादा छाए रहे। अधिकांश लोगों का कहना था कि मुख्य नहरों के साथ ही गांवों में बनी नहरों की मरम्मत न होने से क्षेत्र में गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है। गूलों में घरों का गंदा पानी छोड़े जाने से खेत की उर्वरा शक्ति भी कम होने लगी है। लोगोें ने कहा कि देवरामपुर और शिवराजपुर में विभाग मालन नदी में सुरक्षा दीवार बनाने के बजाय सिंचाई विभाग जाल डालकर कच्चे तटबंध बना रहा है।
रविवार को दुर्गापुरी स्थित हल्दी हाथ वेडिंग प्वाइंट में आयोजित अमर उजाला चौपाल में सिंचाई विभाग के एसडीओ सीपी भट्ट और उनके अधीनस्थ अवर अभियंताओं ने लोगों की समस्याएं सुनीं। भाबर के जेपी बहुखंडी ने कहा कि दाईं मालन नहर से तो विभाग ने मलबा साफ करा दिया है, लेकिन नहर की मरम्मत अभी तक नहीं हुई है। एसडीओ सीपी भट्ट ने बेलदारों को लगाकर नहर में फंसा कचरा साफ करने का आश्वासन दिया। कहा कि नहर की मरम्मत के लिए इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
शिवराजपुर निवासी ख्याली सिंह ने कहा कि गूलों में पेयजल लाइनें बिछी होने के कारण नहर की सफाई में काश्तकारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। घरों का गंदा पानी गूलों में छोड़े जाने से खेती प्रभावित हो रही है। मुख्य नहर से लगी सड़क में ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से बरसात में सड़क का मलबा और पत्थर गिरने से नहर क्षतिग्रस्त होने के साथ ही बार-बार बंद हो जाती है। एसडीओ ने कहा कि लोगोें से गंदे पानी के लिए सोख्ता पिट बनाने की अपील की जा रही है। घरों का गंदा पानी नहर में छोड़ने वालों को नोटिस जारी कर चालान काटे जाएंगे। लछमपुर कलालघाटी निवासी आभा डबराल ने कलालघाटी में बने घराट को पुनर्जीवित करने की मांग की। सिंचाई नहर ढालदार होने के कारण वहां दुर्घटना की आशंका भी बनी है। एसडीओ ने कहा कि उरेडा को पत्र लिखकर इस बारे में बताया जाएगा।
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सिगड्डी निवासी महेश सती ने कहा कि सिगड्डी स्रोत से गांव के लिए बनाई गए सिगड्डी सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त होने से गत दो वर्षों से बंद पड़ी हुई है, जबकि श्रीरामपुर में नहर मलबे में दब गई है। लोगों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। एसडीओ ने कहा कि हेड से नहर के निर्माण के लिए आपदा मद में आगणन बनाकर भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। रतनपुर सुखरौ निवासी राजाराम अण्थ्वाल और विजय ध्यानी ने दाईं खोह नहर को हनुमान मंदिर से लालबत्ती चौराहे तक भूमिगत करने की मांग उठाई। एसडीओ ने कहा कि विभाग के पास पैसा उपलब्ध है, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण यह कार्य लंबित पड़ा है।
-फोटो
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रविवार को दुर्गापुरी स्थित हल्दी हाथ वेडिंग प्वाइंट में आयोजित अमर उजाला चौपाल में सिंचाई विभाग के एसडीओ सीपी भट्ट और उनके अधीनस्थ अवर अभियंताओं ने लोगों की समस्याएं सुनीं। भाबर के जेपी बहुखंडी ने कहा कि दाईं मालन नहर से तो विभाग ने मलबा साफ करा दिया है, लेकिन नहर की मरम्मत अभी तक नहीं हुई है। एसडीओ सीपी भट्ट ने बेलदारों को लगाकर नहर में फंसा कचरा साफ करने का आश्वासन दिया। कहा कि नहर की मरम्मत के लिए इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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शिवराजपुर निवासी ख्याली सिंह ने कहा कि गूलों में पेयजल लाइनें बिछी होने के कारण नहर की सफाई में काश्तकारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। घरों का गंदा पानी गूलों में छोड़े जाने से खेती प्रभावित हो रही है। मुख्य नहर से लगी सड़क में ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से बरसात में सड़क का मलबा और पत्थर गिरने से नहर क्षतिग्रस्त होने के साथ ही बार-बार बंद हो जाती है। एसडीओ ने कहा कि लोगोें से गंदे पानी के लिए सोख्ता पिट बनाने की अपील की जा रही है। घरों का गंदा पानी नहर में छोड़ने वालों को नोटिस जारी कर चालान काटे जाएंगे। लछमपुर कलालघाटी निवासी आभा डबराल ने कलालघाटी में बने घराट को पुनर्जीवित करने की मांग की। सिंचाई नहर ढालदार होने के कारण वहां दुर्घटना की आशंका भी बनी है। एसडीओ ने कहा कि उरेडा को पत्र लिखकर इस बारे में बताया जाएगा।
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सिगड्डी निवासी महेश सती ने कहा कि सिगड्डी स्रोत से गांव के लिए बनाई गए सिगड्डी सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त होने से गत दो वर्षों से बंद पड़ी हुई है, जबकि श्रीरामपुर में नहर मलबे में दब गई है। लोगों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। एसडीओ ने कहा कि हेड से नहर के निर्माण के लिए आपदा मद में आगणन बनाकर भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। रतनपुर सुखरौ निवासी राजाराम अण्थ्वाल और विजय ध्यानी ने दाईं खोह नहर को हनुमान मंदिर से लालबत्ती चौराहे तक भूमिगत करने की मांग उठाई। एसडीओ ने कहा कि विभाग के पास पैसा उपलब्ध है, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण यह कार्य लंबित पड़ा है।
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