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पुलवामा हमले के विरोध में एबीवीपी ने फूंका पाकिस्तान का पुतला

Sat, 16 Feb 2019 10:06 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 16 Feb 2019 10:06 PM IST
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पुलवामा हमले के विरोध में एबीवीपी ने फूंका पाकिस्तान का पुतला
कोटद्वार। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए आत्मघाती हमले से आक्रोशित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पाकिस्तान का पुतला फूंका। छात्र-छात्राओं ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उससे सभी संबंध समाप्त करने की मांग की है।
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शनिवार को संगठन के प्रांत प्रमुख गौरव जोशी के नेतृत्व में एबीवीपी कार्यकर्ता राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार के गेट पर एकत्र हुए। उन्होंने सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और प्रदर्शन के बीच पाकिस्तान का पुतला फूंका। इस अवसर पर गौरव जोशी ने कहा कि भारत के सैनिकों द्वारा आतंकवादियों के सफाए के लिए चलाई जा रही मुहिम से पाकिस्तान बौखला गया है। इसकी बौखलाहट में वह इस प्रकार की कायरतापूर्ण आत्मघाती हमले कर रहा है। इस घटना में आतंकवादियों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के कार्य करने का खुलासा हो चुका है, इसलिए देश को पाकिस्तान के खिलाफ सैनिक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एबीवीपी इस घटना के विरोध में प्रदेशभर में मुहिम चलाएगा। अगले चरण में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इस अवसर पर एबीवीपी के संगठन मंत्री पृथ्वी राणा, जिला संयोजक आकाश रावत, नितिन कुमार, अजय कुमार, शिवांगी, सिमरन व हिमांशु आदि मौजूद थे।
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पुलवामा की घटना इंटेलीजेंस फेलियर : नेगी
कोटद्वार। उत्तराखंड अर्द्ध सैनिक कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त डीआईजी बलराम सिंह नेगी ने पुलवामा की घटना को इंटेलीजेंस फेलियर करार दिया है। यहां जारी बयान में पूर्व डीआईजी ने कहा कि केद्रीय सुरक्षा बलों के वाहन जम्मू से कश्मीर पिछले कई दशकों से चल रहे हैं। इनकी रक्षा के लिए बड़ी मात्रा में केंद्रीय बलों के जवान ही लगे हुए हैं, जो जंगल, पहाड़ में रास्तों के किनारे वाहनों के लिए सुरक्षित करते हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र में सैकड़ों किलो बारूद भरी कार कानबाई के बीच की गाड़ी पर टक्कर मारकर फिदायीन हमला करने की यह घटना दुखद है।
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उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल के पिछले वर्षों में सैकड़ों जवान शहीद हो चुके हैं, लेकिन उन्हें आज भी आठ घंटे की सिविल सेवा के तहत रखा गया है। इनके अपने कमांडर न होने के कारण उनकी तकलीफें और सूचनाएं भी सरकार तक सही समय पर नहीं पहुंचती हैं। उन्होंने सरकार से केंद्रीय बलों के लिए अलग केंद्रीय सुरक्षा मंत्रालय बनाकर उनका परिचालन तंत्र विकसित करने की मांग की है।
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