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कोटद्वार से लैंसडौन तक बैंकों में पैसा नहीं, एटीएम खाली
Updated Fri, 13 Apr 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार/लैंसडौन। गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार समेत जिले की सभी ग्रामीण बैंक शाखाओं में एक माह से करेंसी का टोटा बना हुआ है। कोटद्वार के बैंकों का रोटेशन स्थानीय व्यापारियों पर केंद्रित हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों ने करेंसी का टोटा होने के कारण पैसा देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। एटीएम खाली पड़े हैं। एक दो बैंकों के एटीएम में पैसा लेने के लिए लोगों को घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि चार महीने से भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उन्हें करेंसी नहीं भेजी गई है।
कोटद्वार शहर में सार्वजनिक, सहकारी और निजी बैंकों की करीब 30 ब्रांचें और इतने ही एटीएम हैं, लेकिन वे कैशलैस चल रहे हैं। बैंकों के एटीएम में खड़े उमेश कंडवाल, सुमित कुमार, राजू शर्मा, विवेक राय व राम सिंह ने बताया कि बैंक में उपभोक्ताओं की ओर से जमा होने वाले पैसे से ही लेनदेन किया जा रहा है। बैंकों के एटीएम में कैश की मारामारी हो रही है। एसबीआई दुर्गापुर में बुरा हाल है। यहां 15 दिन से पैसा नहीं है। शादी-बारात का सीजन होने के कारण हर किसी को नकदी की जरूरत है। एसबीआई दुर्गापुर के ग्राहक उमेश कंडवाल ने बताया कि उन्हें बैंक से लौटा दिया गया है। कोटद्वार में एटीएम की लाइन पर लगे थे, लेकिन थोड़ी देर में ही पैसा खत्म हो गया। कोटद्वार से लेकर लैंसडौन, बीरोंखाल तक यही हाल है।
लैंसडौन में बैंकों में जमा अपने धन को निकालने के लिए जनता को मारे-मारे फिरना पड़ रहा हैं। राजेंद्र प्रसाद, गिरीश चंद्र, शिवप्रसाद, ओमप्रकाश, वीर सिंह रावत, बूथाराम, सीता राम व अनिल कुमार का कहना है कि बैंकों की कार्यप्रणाली से जनता में बैंकों व सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। एटीएम से पैसा न मिलने से पर्यटक भी परेशान हैं। इससे व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। उत्तरांखड ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अनुराग पुंडीर ने बताया कि बैंक को आरबीआई कानपुर से पैसा नहीं मिल पा रहा हैं।
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पौड़ी जिले में तीन बड़ी कैश चेस्टों में तीन माह से आरबीआई से करेंसी नहीं आ सकी है। इसके चलते उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लगातार डिमांड भेजी जा रही है।
-बिजेंद्र सिंह कलूड़ा, एजीएम एसबीआई देहरादून।
-फोटो
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कोटद्वार शहर में सार्वजनिक, सहकारी और निजी बैंकों की करीब 30 ब्रांचें और इतने ही एटीएम हैं, लेकिन वे कैशलैस चल रहे हैं। बैंकों के एटीएम में खड़े उमेश कंडवाल, सुमित कुमार, राजू शर्मा, विवेक राय व राम सिंह ने बताया कि बैंक में उपभोक्ताओं की ओर से जमा होने वाले पैसे से ही लेनदेन किया जा रहा है। बैंकों के एटीएम में कैश की मारामारी हो रही है। एसबीआई दुर्गापुर में बुरा हाल है। यहां 15 दिन से पैसा नहीं है। शादी-बारात का सीजन होने के कारण हर किसी को नकदी की जरूरत है। एसबीआई दुर्गापुर के ग्राहक उमेश कंडवाल ने बताया कि उन्हें बैंक से लौटा दिया गया है। कोटद्वार में एटीएम की लाइन पर लगे थे, लेकिन थोड़ी देर में ही पैसा खत्म हो गया। कोटद्वार से लेकर लैंसडौन, बीरोंखाल तक यही हाल है।
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लैंसडौन में बैंकों में जमा अपने धन को निकालने के लिए जनता को मारे-मारे फिरना पड़ रहा हैं। राजेंद्र प्रसाद, गिरीश चंद्र, शिवप्रसाद, ओमप्रकाश, वीर सिंह रावत, बूथाराम, सीता राम व अनिल कुमार का कहना है कि बैंकों की कार्यप्रणाली से जनता में बैंकों व सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। एटीएम से पैसा न मिलने से पर्यटक भी परेशान हैं। इससे व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। उत्तरांखड ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अनुराग पुंडीर ने बताया कि बैंक को आरबीआई कानपुर से पैसा नहीं मिल पा रहा हैं।
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पौड़ी जिले में तीन बड़ी कैश चेस्टों में तीन माह से आरबीआई से करेंसी नहीं आ सकी है। इसके चलते उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लगातार डिमांड भेजी जा रही है।
-बिजेंद्र सिंह कलूड़ा, एजीएम एसबीआई देहरादून।
-फोटो